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अक्षय तृतीया पर दिव्य शक्ति अखाड़ा ने किया चार महामंडलेश्वरों को सुशोभित

 अक्षय तृतीया पर दिव्य शक्ति अखाड़ा ने किया चार महामंडलेश्वरों को सुशोभित 

सहारनपुर-प्रसिद्ध भागवत धर्माचार्य और कथावाचक उद्धव कोदंड श्याम सखा द्वारा बेरीबाग में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में दिव्य शक्ति अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर सन्त श्री कमलकिशोर जी महाराज, मुख्य संरक्षक अवधूत बाबा निरंजननाथ जी महाराज, महामंडलेश्वर आचार्य रमेश सेमवाल जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री सुरेंद्र शर्मा जी महाराज, महामंडलेश्वर श्री अरविंदसिंह शास्त्री जी महाराज तथा अन्य संतों तथा धर्मप्रेमियों की पावन उपस्थिति में सहारनपुर से पंडित अनिल कोदण्डश्याम सखा और पंडित विद्यासागर चूड़ामणि तथा अहमदाबाद से धर्मगुरु श्रीमती निर्मला सोनी जी व बारां राजस्थान से धर्मगुरु कृष्ण मुरारी योगी जी को आचार्य अमित शर्मा और आचार्य नीरज शर्मा द्वारा  पूर्ण वैदिक पद्धति मंत्रोच्चारण, शंखध्वनि और हवन द्वारा महामंडलेश्वर पद पर सुशोभित किया गया।

सभी नवसुशोभित महामंडलेश्वरों का पुष्पमालाओं से स्वागत कर दिव्य शक्ति अखाड़ा द्वारा उन्हे सम्मान चिन्ह,प्रमाण-पत्र, परिचय-पत्र, शाल, त्रिशूल, अंगवस्त्र और रुद्राक्ष अभिमंत्रित माला प्रदान की गई।ज्ञात हो कि भारत एवं समस्त विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में सनातन के लिए प्राणपण से कार्य कर रहे त्यागी महापुरुषों को दिव्य शक्ति अखाड़े के भगवाधारी महामंडलेश्वर का दायित्व और त्रिशूल प्रदान किया जाता है ।  अखाड़ों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अवधूत बाबा निरंजननाथ जी ने बताया कि सनातन एवं हिंदू धर्म की रक्षा विधर्मियों से रक्षा के लिए अखाड़े बनाए गए थे। आज भी अखाड़े के साधु संत मोह त्याग कर धर्म और मानवता की रक्षा हेतु जनकल्याण हेतु जनजागरण अभियानों को चलाते रहते हैं और इसमें दिव्य शक्ति अखाड़ा भी प्रमुखता से कार्य करने के लिए जाना जाता है । आचार्य महामंडलेश्वर सन्त  कमलकिशोर जी ने सनातन धर्म की व्याख्या करते हुए बताया कि आदिकाल से जो धर्म अस्तित्व में है उसी का नाम सनातन है और वह जीवन जीने की कला को सिखाता है। हर युग में देवता और दैत्य, दुष्ट और सज्जन व्यक्तियों का आपस में संघर्ष होता रहता है आसुरी प्रवृत्ति के लोग अहंकारी बनकर सज्जन व्यक्तियों को परेशान करते हैं और उन पर अपना वर्चस्व स्थापित करना अपना अधिकार समझते हैं।  इसके लिए वे नीचता की किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसे में धर्मगुरुओं, संतो, महात्माओं और आम जन की रक्षा के लिए अखाड़े बनाए गए और अखाड़ों ने अपना कर्तव्य पूर्ण निष्ठा के साथ निभाया वर्तमान युग में भी दुष्टों का सामना करने के लिए सभी अखाड़े मिलकर कार्य कर रहे हैं।महामंडलेश्वर आचार्यश्री रमेश सेमवाल ने कहा कि अन्याय के सामने मौन रहना और उसका विरोध ना करना एक तरह की कायरता है।  हमारे धर्मग्रंथ गीता, रामायण,पुराण हमें निर्भीकता सिखाते हैं।  हमारे सभी देवी देवताओं के हाथों में असुरों को मारने के लिए शक्ति के रूप अस्त्र-शस्त्र में मौजूद हैं अतः हमें भी अपने धर्म की रक्षा के लिए और आत्मरक्षा के लिए अस्त्र-शस्त्र चलाने में निपुणता प्राप्त करनी चाहिए,तभी हम धर्म की रक्षा कर सकते हैं इस अवसर पर महामंडलेश्वर सुरेंद्र शर्मा जी महाराज अरविंद शास्त्री जी महाराज, अनिल कोदण्ड जी महाराज, विद्यासागर चूड़ामणि जी महाराज, कृष्ण मुरारी योगी जी महाराज, श्रीमती निर्मला सोनी जी महाराज ने भी धर्म के प्रति में अपने विचार प्रकट किए। अक्षय तृतीया के पवित्र अवसर पर पंडित ओमकार चूड़ामणि, धीरेंद्र सिंह राठौर, दीपांकर, अरविंद कुमार,श्रवण कुमार पांडे, आचार्य प्रवीण भान, आचार्य विपिन डागर,आचार्य अजय वर्मा, अरुण पंडित जी सहित  सैकड़ों गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच का सुघड़ और सफल संचालन महेश नारंग ने किया

रिपोर्ट-अमान उल्ला खान

     







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