जान हथेली पर रखकर समाजसेवा करने वाले राशन डीलरो के प्रति ठीक करे रवैया-जोगेंद्र सैनी
रिपोर्ट-एसडी गौतम
नागल-थाना क्षेत्र के गांव पहाड़पुर मे बीते दिनों हुए प्रकरण में उस समय नया मोड़ आ गया जब राशन डीलर पति ने अपना पक्ष रखते हुए मोर्चा खोलकर आरोप लगाने वालों को आईना दिखा दिया।
गांव पहाड़पुर में एक झगड़ा हो गया था जिसमे एक युवक द्वारा राशन डीलर पति पर समझौता करने का दबाव बनाने तथा मारपीट करने व राशन वितरण में अनियमिता का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर देकर कार्यवाही की मांग की गई थी जिस पर अनेकों समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई थी। जिसपर राशन डीलर पति जोगेंद्र सैनी ने बताया कि जिस व्यक्ति द्वारा उनके खिलाफ अनियमिता का आरोप लगाया गया था वह व्यक्ति पिछले करीब डेढ़ साल से भी अधिक समय से दूसरे गांवों के डीलर से राशन प्राप्त कर रहा है तो फिर मेरे द्वारा किस प्रकार और कैसी अनियमिता बरती जा रही है और अगर ऐसा है तो संबंधित अधिकारियों से अवगत कराना चाहिए था और रही बात कमिश्नरी तो वहां से उन्हे जांच उपरांत अधिकारियो द्वारा क्लीनचिट दे दी गई थी जिससे खुन्नस खाकर मेरी बढ़ती लोकप्रियता व प्रतिष्ठा से बौखलाकर विपक्षी लोग इसे पचा नहीं पा रहे है और कुछ लोगो की कठपुतली बनकर उनके खिलाफ लगातार आरोप लगाकर उनकी छवि धूमिल करने का घिनौना कार्य कर रहे है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से प्रकाशित खबरों पर बात रखते हुए कहा कि कोरोना काल में अपनी जान हथेली पर रखकर तथा समाज के प्रत्येक सुख दुख में शामिल होकर सहयोग वाले राशन डीलरो को आज हर कोई बुरी नजर से देखता है जो कि बहुत ही सोचनीय विषय है क्योंकि पत्रकार देश का चौथा स्तंभ है जिसका वह दिल से सम्मान करते है लेकिन बिना किसी दूसरे का पक्ष जाने ही खबरे प्रकाशित करना भी उचित नही है। उन्होने सभी से राशन डीलरो के प्रति अच्छा रवैया अपनाने की बात कहते हुए न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि क्षेत्र के एक गांव में राशन डीलर पति पर एक उपभोक्ता के साथ मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था जबकि उसके पास कोई कार्ड आदि नही था लेकिन फिर भी उक्त प्रकरण में राशन डीलर व अन्य व्यक्ति जेल में बंद है। अब यहां सवाल यह उठता है कि अगर जेल में बंद व्यक्ति कभी बरी हो जाते है तो क्या फिर उनकी समाज में खोई इज्जत वापस आ सकती यह एक बड़ा सवाल है? या फिर अपनी हठधर्मिता के चलते अपनी राजनीति चमकाने में किसी के जीवन को दांव पर लगा देना किस हद तक सही है?

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