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वीरेन्द्र आज़म की कविताओं को सार्क कवि सम्मेलन में भी मिली सराहना

वीरेन्द्र आज़म की कविताओं को सार्क कवि सम्मेलन में भी मिली सराहना

 दिल्ली के एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट एण्ड लिटरेचर में हुआ था आयोजन

रिपोर्ट-अमान उल्ला खान

सहारनपुर-सहारनपुर के साहित्यकार एवं कवि डॉ.वीरेन्द्र आज़म की कविताओं को सार्क देशों के कवि सम्मेलन में भी सराहा गया है। दिल्ली के एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट एण्ड लिटरेचर में आयोजित चार दिवसीय 64 वे फोसवाल लिटरेचर फेस्टिवल में डॉ. वीरेन्द्र आज़म को काव्य पाठ के लिए आमंत्रित किया गया था। समारोह 3 दिसंबर से 6 दिसम्बर तक आयोजित किया गया।

फाउण्डेशन ऑफ सार्क राइटर्स एण्ड लिटरेचर द्वारा आयोजित इस समारोह में भारत के अलावा नेपाल, भूटान, बंगलादेश, श्रीलंका के साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। भारतीय साहित्यकारों के अलावा विदेश के एक सौ से अधिक साहित्यकार शामिल रहे। फोसवाल की अध्यक्ष पद्मश्री अजीत कौर व उपाध्यक्ष देवप्रकाश चौधरी ने सभी मेहमानों का बडे़ उत्साह से स्वागत किया। समारोह में कहानी, कविता, हाइकु, ग़ज़ल तथा उर्दूू शायरी व पंजाबी कविताओं का भी पाठ किया गया। समारोह में युद्ध की विभिषिका और युद्ध से मानव जीवन व पर्यावरण तथा विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर कई सत्रों में चर्चा हुई। इस विषय पर काव्य पाठ भी किया गया। 

फेस्टिवल के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष व प्रख्यात साहित्यकार माधव कौशिक ने की। उन्होंने भक्ति पर मुख्य भाषण दिया। इसके अलावा सूफिज्म व बुद्धिज्म पर भी मुख्य भाषण दिए गए। भारत में नेपाल के राजदूत डॉ.शंकर प्रसाद शर्मा भी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रहे। सहारनपुर के साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र आजम ने हाल में ही जोशीमठ में आयी दरारों और उत्तरकाशी टनल हादसे पर आधारित कविता ‘प्रकृति’ के अलावा ‘दूरी’ सहित चार कविताओं का काव्य पाठ किया। जिन्हें तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खूब सराहा गया।

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