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अंतिम लक्ष्य हर पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में ससम्मान स्थापित करना

अंतिम लक्ष्य हर पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में ससम्मान स्थापित करना 

राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन संपन्न 

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हल्द्वानी-कुमाऊँ क्षेत्र में संकट का सामना कर रही महिलाओं को त्वरित न्याय,तत्काल प्राथमिक उपचार और एक मजबूत सुरक्षा कवच देने के उद्देश्य से एक व्यापक और नई शुरुआत की गई है। उत्तराखंड राज्य महिला आयोग व सीडीएस जनरल बिपिन रावत के संयुक्त तत्वावधान में बहुउद्देशीय सभागार,उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय (हल्द्वानी) में एक दिवसीय राज्य स्तरीय क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन संपन्न हुआ।संवाद सत्र में कुमाऊँ मंडल के सभी जनपदों के वन स्टॉप सेंटरों की काउंसिलर्स,केस वर्कर्स,महिला पुलिसकर्मियों,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिवक्ताओं और संरक्षण अधिकारियों भी मौजूद रहे।

कार्यशाला का शुभारंभ विधायक मोहन सिंह बिष्ट,जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल,कुलपति उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रो.नवीन चंद्र लोहनी,अध्यक्ष उत्तराखंड राज्य महिला आयोग कुसुम कण्डवाल द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने महिला आयोग के इस नवाचार की सराहना करते हुए इसे सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया।अध्यक्ष कुसुम कण्डवाल ने कहा कि कि जब कोई प्रताड़ित महिला तमाम सामाजिक बंधनों,लोक-लाज और प्रतिशोध के भय को छोड़कर बेहद नाजुक मानसिक स्थिति में मदद की आस लेकर हमारे पास पहुँचती है,तो हमारा प्राथमिक उद्देश्य केवल विधिक कागजी कार्रवाई को पूरा करना नहीं है,बल्कि उस संकटकालीन गोल्डन आवर (पहले घंटे) में उसकी पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए उसे एक भयमुक्त वातावरण देना है।जब अदालती प्रक्रियाओं के लंबे खिंचने से पीड़ित महिलाएँ भीतर से हताश हो जाती हैं,तब महिला आयोग,पुलिस विभाग और विधिक सेवा प्राधिकरण को आपसी समन्वय से एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा होना होगा।हमारा अंतिम लक्ष्य हर पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में ससम्मान स्थापित करना है।इस ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य धरातल पर ऐसे मास्टर ट्रेनर्स तैयार करना है जो आगे चलकर समाज में महिलाओं के अधिकारों के लिए एक सुरक्षा तंत्र विकसित कर सकें।उप निरीक्षक पुलिस विभाग सुनीता कुंवर ने उत्तराखंड में संचालित त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र की व्यावहारिक कार्यप्रणाली को विस्तार से समझाया। आपातकालीन परिस्थितियों के लिए उन्होंने महिला चीता वाहिनी और डायल 112 की त्वरित सक्रियता के बारे में जानकारी दी।उन्होंने वन स्टॉप सेन्टर एवं महिला हैल्पडेस्क कर्मियों को बताया कि किस प्रकार समन्वय बनाते हुए किसी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करना है।विधिक सत्र के दौरान अभियोजन विभाग के पूर्व अपर निदेशक (विधि) हरि विनोद जोशी ने भारतीय न्याय संहिता और पोक्सो अधिनियम के नवीन आयामों पर विस्तृत विधिक जानकारी साझा की।उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग के डॉ.ललित मोहन पंत ने वन स्टॉप सेंटर के काउंसिलर्स को मानसिक आघात(ट्रॉमा)से पीड़ित महिलाओं को संभालने की विशेष कला सिखाई।डॉ.ऐश्वर्या कांडपाल ने कहा कि आज भी समाज यौन उत्पीड़न जैसे विषयों पर खुलकर बात करने से कतराता है।ऐसी स्थिति में पीड़िता के उपचार के दौरान उसकी पहचान को पूरी तरह गुप्त रखना चिकित्सा स्टाफ का परम कर्तव्य है। उन्होंने संकट के शुरुआती गोल्डन आवर में तत्काल प्राथमिक चिकित्सा देने,मेडिकल परीक्षण के दौरान पीड़िता के आत्मसम्मान की रक्षा करने की जानकारी पर बल दिया।प्रतिनिधि महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग,देहरादून आरती बलोदी ने देशभर में संचालित वन स्टॉप सेंटर्स के धरातलीय आंकड़ों के माध्यम से मानवाधिकारों के सिद्धांतों का हवाला देते हुए बताया कि पीड़ित महिलाएँ अक्सर मूल अपराध से ज्यादा समाज के नजरिए ,पूर्वाग्रहों और लोगों की जजमेंटल प्रतिक्रियाओं से भयभीत रहती हैं;यही मुख्य वजह है कि केवल 17ःपीड़ित महिलाएँ ही साहस जुटाकर रिपोर्ट दर्ज करवा पाती हैं।उन्होंने ओएससी के समस्त स्टाफ को कड़े निर्देश दिए कि रूढ़िवादी सामाजिक दृष्टिकोण को पूरी तरह दरकिनार कर सर्वाइवर- सेंट्रिक अप्रोच अपनाएं और शांत परिवेश के साथ-साथ पीड़िता को विभाग की सभी पुनर्वास व कल्याणकारी योजनाओं से तत्काल लाभान्वित करें।कार्यशाला में कुमाऊँ मंडल के विभिन्न जनपदों से आए कार्मिकों और हेल्पडेस्क प्रभारियों ने अपनी रोज़मर्रा की व्यावहारिक कठिनाइयों का समाधान प्राप्त किया।संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन डॉ.नागेंद्र गंगोला द्वारा किया गया। कार्यशाला में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष सायरा बानो,कुलपति प्रो.नवीन चन्द्र लोहनी,जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल,आयोग की सदस्य विमला अधिकारी,डॉ.रेनू प्रकाश,डॉ.नमिता वर्मा,डॉ.आशुतोष पंत,आधार वर्मा,आयोग के कर्मचारीगण तथा अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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