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अपने बुजुर्गों का बलिदान भूलने वाली कौमें जिंदा नहीं रहती-संधू

अपने बुजुर्गों का बलिदान भूलने वाली कौमें  जिंदा नहीं रहती-संधू 

 रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर- लोहा बाजार स्थित शहीद स्मारक आज सुबह 'भारत माता की जय';  'देश के अमर शहीद- अमर रहे अमर रहे' के नारो से गूंज उठा । 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 169 वीं वर्षगांठ पर आज शहर के गणमान्य लोगों ने पुष्प अर्पित कर तथा पुलिस गारद ने सशस्त्र सलामी देकर देश के अमर स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को अपनी भावांजलि दी। नगर निगम के सहयोग से श्री ललिता- पन्ना स्वतंत्रता सेनानी स्मारक समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता शहीद भगत सिंह के भतीजे किरणजीत संधू ने तथा संचालन डॉ .वीरेंद्र आज़म ने किया। 

वक्ताओं ने इस बात पर क्षोभ व्यक्त किया कि आमजन ही नहीं राजनेताओं और प्रशासन के अधिकारियों में भी शहीदों के प्रति संवेदना कम हो रही है। शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए भी उनके पास समय नहीं है। किरणजीत संधू   ने कहा कि वह कौमें जिंदा नहीं रहती जो अपने बुजुर्गों का बलिदान भूल जाती हैं, उनकी कुर्बानियां भूल जाती है।उन्होंने कहा कि आजादी के दीवानों को पता था कि वे आजादी देखने के लिए जिंदा नहीं रहेंगे लेकिन उन्होंने अपनी भावी पीढ़ियों के लिए फांसी पर लटकाना मंजूर किया और अपना जीवन बलिदान कर दिया। पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 10 मई को शहीदों को नमन करने के अलावा क्रांति दिवस इसलिए भी मनाया जाता है कि हमारी युवा पीढ़ी अपने बुजुर्गों की स्मृति को याद रखें और क्रांतिकारियों के जीवन को जानकर उससे राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा ले। उन्होंने ऋषिकुल के छात्र जगदीश वत्स की कुर्बानी का भी उल्लेख किया। 
समिति के अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक जयनाथ शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन और शहीदों की कुर्बानियां शिक्षा का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की आजादी हमारे बुजुर्गों की धरोहर है और हमें इसे संभाल कर रखना होगा। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए महापौर डॉक्टर अजय कुमार और नगर आयुक्त शिपु गिरि का समिति की ओर से आभार व्यक्त किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र शर्मा  ने कहा कि बच्चों को पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा के साथ-साथ  देशभर के क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान की गाथाएं अनिवार्य रूप से पढ़ाई जानी चाहिए। समाजसेवी महेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह विडंबना है कि आज कोई भी अधिकारी शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम में नहीं पहुंचा है। 
साहित्यकार डॉ वीरेंद्र आजम ने लोहा बाजार  और चौकी सराय पर पीपल के पेड़ पर 1857 के क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाए जाने की घटनाओं के साथ ही सहारनपुर में क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री पकड़े जाने आदि स्वतंत्रता आन्दोलन इतिहास की अनेक घटनाओं का उल्लेख करते हुए शहीदों को नमन किया।  इसके अतिरिक्त पूर्व पार्षद आशुतोष सहगल, नरेंद्र बंसल व संदीप सैनी ने भी शहीदों को नमन करते हुए अपनी श्रद्धांजलि दी और शहीदों के जीवन से राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त विक्रम सिंह सढ़ौली, विनय जिंदल तथा थाना मंडी प्रभारी सतपाल भाटी ने भी 1857 के शहीदों को अपनी भावांजलि दी। इस्लामिया इंडस्ट्रियल मुस्लिम गर्ल्स इंटर कॉलेज की छात्रा कुमारी कशिश अफजाल ने संस्कृत में राष्ट्रभक्ति का गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में जेबीएस हिंदू कन्या इंटर कॉलेज की खुशबू श्रीवास्तव, श्री दिगंबर जैन कन्या इंटर कॉलेज की दीपमाला और मोनिका सहित उक्त विद्यालयों की बालिकाएं बड़ी संख्या में शामिल रही।                

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