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अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026

 अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव 2026

योग से वैश्विक संयोग-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

ऋषिकेश-परमार्थ निकेतन में जारी अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव-2026 के दूसरे दिन प्रतिभागियों के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा,योग और ज्ञान का समृद्ध अनुभव देने वाला रहा।

इस महोत्सव में करीब 80देशों के लगभग 1,500 प्रतिभागी भारत की प्राचीन योग परम्परा हठ,अष्टांग,विन्यास, कुंडलिनी,नाड़ीयोग,आयुर्वेद,प्राणायाम,ध्यान,पवित्रमंत्र,यज्ञ,भक्ति कीर्तन जैसी विविध परंपराओं को आत्मसात कर रहे हैं।अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव,परमार्थ निकेतन,आयुष मंत्रालय,भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय,अतुल्य भारत की साझेदारी से आयोजित किया जा रहा है।योग महोत्सव का दूसरा दिन शक्ति-थीम को समर्पित रहा जिसमें आध्यात्मिक ज्ञान सत्र,वैश्विक योग परंपराएँ, आयुर्वेद सत्र और ड्रम वादक शिवमणि के ताल व रूना रिजवी शिवमणि के मंत्रमुग्ध कर देने वाले संगीत को समर्पित रहा।महोत्सव की शुरुआत प्राचीन गंगा तट पर योग,ध्यान और आध्यात्मिक अनुभवों से हुई।परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि योग केवल शरीर की साधना नहीं,बल्कि जीवन को बदलने वाली विज्ञान और कला है।यह हमें शारीरिक,मानसिक और आध्यात्मिक त्रिविध संतुलन का अनुभव कराता है।ध्यान के माध्यम से हम अपने अंतरमन की गहराइयों में उतरते हैं,जहाँ शांति और स्थिरता का स्रोत स्वतःजाग्रत होता है।स्वामी जी ने कहा कि शिव और शक्ति का स्वरूप हमें संदेश देता है कि सृजन और संहार,शक्ति और शांति,क्रिया और ध्यान सभी हमारे भीतर विद्यमान हैं।शिव की तरह निर्लिप्त चेतना हमें अहंकार से मुक्त करती है,और शक्ति की तरह सक्रिय ऊर्जा हमें सृजनात्मकता और साहस प्रदान करती है।स्वामी जी ने कहा कि योग और ध्यान हमें अपने भीतर की गहरी चेतना से जोड़ते हैं और जीवन के प्रत्येक क्षण को साक्षी भाव,करुणा और जागरूकता के साथ जीने की क्षमता देते हैं।यही शक्ति है,यही शांति है जो केवल साधना से प्राप्त होती है। अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक,डा.साध्वी भगवती सरस्वती ने कहा कि“मन के परे मौन ,आंतरिक जागरण के लिए हिमालयन ध्यान” में,जो एक अद्वितीय साधना है।यह ध्यान हमें अपने भीतर की गहराइयों में ले जाता है,जहाँ बाहरी दुनिया की हलचल और विचारों का शोर शांत हो जाता है।साधना के माध्यम से हम अपने अंतरमन और आत्मा से सीधे जुड़ सकते हैं और अपने भीतर की स्थायी शांति का अनुभव कर सकते हैं।उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे हम अपने भीतर की गहराइयों में उतरते हैं,हमारे भीतर की सृजनात्मक शक्ति,करुणा और सहज सामंजस्य प्रकट होता है।यह हमें स्मरण कराता है कि असली शक्ति और शांति हमारे भीतर ही निहित है।पवित्र गंगा तट पर आज प्रसिद्ध ड्रमवादक शिवमणि जी के ड्रम की थापें गूँज उठीं और रूना रिजवी शिवमणि की दिव्य आवाज ने सभी साधकों के मन को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस सत्र में अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक,डा.साध्वी भगवती सरस्वती,प्रसिद्ध योगाचार्य,शिवा रिया,प्राण विन्यास योग की संस्थापक,कुंडलिनी योग,योगाचार्य,किआ मिलर और रूना रिजवी शिवमणि की उपस्थिति रही।हठ विन्यास,योगाचार्य आध्या द्वारा संचालित इस सत्र में शाक्ति के माध्यम से रचनात्मकता,करुणा और चेतना जाग्रत करने विषय पर महत्वपूर्ण चिंतन हुआ।वक्ताओं ने बताया कि शक्ति ब्रह्मांड और हमारे भीतर परिवर्तन की प्रेरक ऊर्जा है। योग,प्रत्येक प्राणी के भीतर विद्यमान रचनात्मक शक्ति को जाग्रत करने का मार्ग है।जैसे ही सूर्य की पहली किरणें हिमालय और पवित्र मां गंगा के पावन तटपर आयी प्रतिभागियों ने लीला योग विन्यास,एरिका कौफमैन द्वारा,योग इन मोशन रोहिणी मनोहर द्वारा,और क्लासिकल अयंगर योग में स्टैंडिंग पोजेस,नीरू कथपाल द्वारा,जैसी सत्रों का आनंद लिया।प्रतिभागियों ने भक्ति में झूमकर नृत्य और गरबा के माध्यम से उत्सव मनाया।अंतर्राष्ट्रीय योगाचार्य स्टीवर्ट गिलक्रिस्ट ने कहा कि अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्वस शांति और प्रेम को दुनिया में प्रसारित करने के लिये है।जब लोग अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आते हैं,वे सनातन धर्म और योग का वास्तविक अनुभव कर पाते हैं।

परमार्थ निकेतन में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में आयोजित प्रमुख योग की विधायें

लीला योग,हठ योग,हठ विन्यास योग,विन्यास योग,पावर योग,अष्टांग योग,अयंगर योग,कलारी फ्लो योग,प्राण मंडल विन्यास,सूर्य नमस्कार साधना,सूर्य आराधना,प्राणायाम,प्राणायाम अभ्यास, श्वास विज्ञान,नाड़ी योग,कुंडलिनी ऊर्जा सक्रियण,ध्यान,विशोक ध्यान,कुंडलिनी ध्यान,राज योग ध्यान,हिमालयन मेडिटेशन,मंत्र ध्यान,आध्यात्मिक योग साधनाएँ,कर्म योग,भक्ति योग,कुंडलिनी योग,क्रिया योग,मुद्रा साधना,ध्वनि एवं नाद योग,साउंड हीलिंग,गोंग बाथ,कीर्तन,मंत्र जप,आयुर्वेद एवं स्वास्थ्य,आयुर्वेदिक जीवनशैली,मर्म चिकित्सा,मानसिक स्वास्थ्य,डिजिटल डिटॉक्स,मस्तिष्क संतुलन,विशेष योग अभ्यास,योग निद्रा,यिन योग,रिस्टोरेटिव योग,चक्र संतुलन योग,पंचकोश साधना आदि अनेक विधाओं का अभ्यास कराया जा रहा है।अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में भारत ,अफगानिस्तान,ऑस्ट्रेलिया,ऑस्ट्रिया,बांग्लादेश,बेलारूस,बेल्जियम,भूटान,ब्राजील,बुल्गारिया,बुर्किना फासो,कंबोडिया,कनाडा,चाड,चिली,चीन,कोलम्बिया,कोस्टारिका,क्यूबा,डेनमार्क,इक्वाडोर,फीजी,फ्रांस,जॉर्जिया,जर्मनी,घाना,गुयाना,गिनी-बिसाऊ,इंडोनेशिया,ईरान,आयरलैंड,इजराइल,इटली,जापान,कजाख़स्तान,कोरिया,किर्गिजस्तान,लाओस,मलेशिया,मालदीव,मॉरीशस,मेक्सिको,मोल्डोवा,म्यांमार,नेपाल, न्यूजीलैंड,नाइजर,नाइजीरिया,नॉर्वे,ओमान,पेरू,पुर्तगाल,रोमानिया,रूस,सर्बिया,स्लोवाकिया,दक्षिण अफ्रीका,स्पेन,आदि 80देशों के अनेक देशों के योग जिज्ञासुओं द्वारा भागीदारी की जा रही है।

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