मेला प्रशासन की पहल पर एनएमसीजी के विशेषज्ञों की टीम ने कुंभ क्षेत्र का किया भ्रमण
अपशिष्ट प्रबंधन तथा बेहतर सैनिटेशन व्यवस्था के उपायों पर मेला प्रशासन के साथ विचार- मंथन
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-आगामी वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने जा रहे कुंभ मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए मेला प्रशासन द्वारा गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका की पहल पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को कुंभ क्षेत्र का भ्रमण किया।टीम ने ठोस एवं तरल अपशिष्ट के प्रभावी प्रबंधन तथा बेहतर सैनिटेशन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उपायों पर मेला प्रशासन के साथ विस्तार से विचार-मंथन किया। विशेषज्ञों की टीम ने इस संबंध में नई तकनीकों,विभिन्न अध्ययनों तथा प्रयागराज कुंभ के अनुभवों को भी मेला प्रशासन के साथ साझा किया।एनएमसीजी की टीम ने मेला प्रशासन, नगर निगम एवं पेयजल निगम के अधिकारियों के साथ हरकी पैड़ी,बैरागी कैंप,दक्ष द्वीप, कनखल,नीलधारा,गौरीशंकर आदि क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया।इस दौरान आगामी कुंभ मेले के दौरान इन क्षेत्रों में स्वच्छता एवं अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपलब्ध सुविधाओं तथा प्रस्तावित कार्यों की पड़ताल की गई।कुंभ क्षेत्र के भ्रमण के बाद एनएमसीजी की टीम ने मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका की अध्यक्षता में मेला प्रशासन तथा सैनिटेशन एवं सीवरेज प्रबंधन से जुड़े विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की।मेलाधिकारी ने कहा कि गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि कुंभ के दौरान कूड़ा एवं सीवरेज प्रबंधन की पर्याप्त और प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना मेला प्रशासन के सामने एक प्रमुख चुनौती है।उन्होंने यह भी कहा कि कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पर्याप्त और साफ-सुथरे शौचालयों की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुंभ मेले में स्वच्छता,सुगमता और सुरक्षा मेला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं,जिसके लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।मेलाधिकारी ने एनएमसीजी की टीम से कुंभ मेले के दौरान सैनिटेशन एवं सीवरेज प्रबंधन की चुनौतियों से निपटने के प्रभावी उपाय सुझाने की अपेक्षा करते हुए कहा कि इसके लिए उपलब्ध आंकड़ों, वर्तमान सुविधाओं तथा मुख्य स्नान पर्वों के दौरान संभावित श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थाओं का सटीक आकलन किया जाना आवश्यक है।इसके आधार पर सभी आवश्यक उपायों को लागू करने के लिए साझा रणनीति तैयार की जाएगी।इस दौरान मेला प्रशासन द्वारा प्रस्तावित व्यवस्थाओं के अंतर्गत कचरा संग्रहण,पृथक्करण,निस्तारण,अस्थायी शौचालयों की स्थापना,सीवरेज प्रबंधन,सेप्टेज प्रबंधन तथा घाटों और मेला क्षेत्र की नियमित सफाई से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर प्रस्तुतीकरण दिया गया।अधिकारियों ने इस दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि कुंभ मेले के दौरान गंगा की अविरलता और निर्मलता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक और टिकाऊ व्यवस्थाएं विकसित की जाएं।इसके लिए मेला क्षेत्र में पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान,कचरा संग्रहण केंद्र,अपशिष्ट परिवहन व्यवस्था तथा अस्थायी शिविर स्थलों में अपशिष्ट निस्तारण के लिए उपयुक्त व्यवस्थाएं की जाएंगी।06एफएसटीपी (फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना भी प्रस्तावित की गई है।इस दौरान एनएमसीजी के विशेषज्ञों की टीम में टेरी के स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के प्रो.शलीन सिंघल,होकाईडो यूनिवर्सिटी (जापान)के प्रो.राम अवतार,आईआईटी बीएचयू के रिसर्च एसोसिएट डॉ.तरुण यादव,स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा उत्तराखंड के आरबीएम डॉ.सिद्धार्थ श्रीवास्तव,नगर आयुक्त हरिद्वार नंदन सिंह ,अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती,उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह गिल तथा पेयजल निगम की परियोजना प्रबंधक (गंगा) मीनाक्षी मित्तल वशिष्ठ सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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