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बहाल, निष्कासन व गुटबाजी के फेर में उलझी बसपा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी, आसपा व सपा को फायदा

 बहाल, निष्कासन व गुटबाजी के फेर में उलझी बसपा से कार्यकर्ताओं में नाराजगी, आसपा व सपा को फायदा

रिपोर्ट एसडी गौतम

सहारनपुर-इन दोनों बहुजन समाज पार्टी में जनपद सहारनपुर में कुछ ठीक नहीं चल रहा है बहाल व निष्कासन के फेर में उलझी हुई पार्टी की राजनीति से नई नवेली पार्टी आजाद समाज पार्टी व मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी को फायदा मिलने का उम्मीद बढ़ गई है।

बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम साहब के बलबूते उनके फार्मूले से चार बार प्रदेश की सत्ता में काबिज रही बहुजन समाज पार्टी ने अनुशासन के मामले में हमेशा अपना एक स्थान बनाए रखा और पार्टी में कभी भी गुटबाजी को कोई मौका नहीं दिया लेकिन बीते कुछ समय से जिस प्रकार से खासतौर से बसपा का गढ़ कहे जाने वाले जनपद सहारनपुर में पार्टी में बढ़ती आपसी गुटबाजी के कारण कभी बसपा नेताओं को जिम्मेदारी देकर पार्टी की बेहतरी की बात की जाती है तो कभी अनुशासनहीनता के नाम पर उनका निष्कासन लगाया जा रहा है लेकिन अनुशासनहीनता आखिर क्या है इस बारे में आजतक कोई स्पष्ट नहीं कर पा रहा है जिससे पार्टी आज शिखर से शून्य की ओर जाती दिखाई दे रही है जिस कारण बसपा की इस कार्यशैली से नाराज कुछ कार्यकर्ता और पूर्व में जिम्मेदार रहे कई गणमान्य समाजवादी पार्टी और आजाद समाज पार्टी में शामिल हो रहे हैं और अगर बहुजन समाज पार्टी की यही स्थिति रही तो आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी व आजाद समाज पार्टी को इस गुटबाजी का भरपूर लाभ मिल सकता है। फिलहाल पार्टी के भीतर उठ रहे इस असंतोष को देखते हुए लोगों में खासी नाराजगी देखी जा रही है और लोग अपने लिए नए राजनीतिक स्थान की तलाश में लगे है। पार्टी में अनुशासन, बहाली, पद व निष्कासन तथा गुटबाजी के संबंध में जब राष्ट्रीय महासचिव, पूर्व राज्यसभा सांसद व सहारनपुर मंडल के मुख्य कॉर्डिनेटर मुनकाद अली से बात की गई तो उन्होंने बहनजी का फैसला बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया तथा कॉर्डिनेटर विजय सिंह जाटव से बात की गई तो उन्होंने बैठकर बात करने की बात कही।

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