प्राचीन ग्रन्थों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण हेतु प्रारम्भ हुआ ज्ञान भारतम् मिशन
ज्ञान भारतम् मिशन के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण हेतु की जाएगी सर्वेक्षकों की नियुक्ति
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-मण्डलायुक्त डाॅ0 रूपेश कुमार ने बताया कि इतिहास, विज्ञान, साहित्य, दर्शन, अध्यात्म आदि की प्राचीन ज्ञान परम्परा पर कागज, ताड़पत्र, कपड़ा, चर्म, धातु की प्लेट आदि पर लिखे गये न्यूनतम 75 वर्ष प्राचीन ग्रन्थों के डिजिटलीकरण एवं संरक्षण हेतु संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा ज्ञान भारतम् मिशन प्रारम्भ किया गया है। उन्होने कहा कि पाण्डुलिपियां अतीत और वर्तमान के मध्य एक सेतु है, जिनमें लिखा हर अक्षर भारत की ज्ञान परम्परा को संजोए हुए है।
मण्डलायुक्त ने मण्डल के तीनों जनपदों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि ज्ञान भारतम् मिशन के सम्यक एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मिशन के अन्तर्गत संचालित राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण हेतु नगरीय क्षेत्रों में वार्डवार एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायत वार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जाए। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति की बैठक शीर्ष प्राथमिकता पर की जाए तथा मिशन के जिला स्तरीय नोडल अधिकारी मुख्य विकास अधिकारी प्रत्येक 15 दिवस में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान की प्रगति की समीक्षा करें। सर्वेक्षकों को राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण की मार्गदर्शिका ई-बुकलेट तथा पाण्डुलिपि सर्वेक्षण कार्य ज्ञान भारतम् मिशन मोबाइल एप के प्रयोग की वीडियो क्लिप uparchives.up.nic.in वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। डाॅ0 रूपेश कुमार ने कहा कि यदि सर्वेक्षकों के लिए प्रशिक्षण की आवश्यता प्रतीत होती है तो मुख्य विकास अधिकारी, निदेशक उ0प्र0 राजकीय अभिलेखागार के माध्यम से वर्चुअल प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराएंगे।
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