वृक्षारोपण सप्ताह के अंतर्गत ग्लोकल विश्वविद्यालय के छात्रों ने सेमिनार में लिया भाग, किया पौधारोपण
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-ग्लोकल विश्वविद्यालय मे छात्र-छात्राओं ने वृक्षारोपण सप्ताह (1 से 7 जुलाई) के अंतर्गत आज बड़कला वन रेंज में आयोजित एक जागरूकता सेमिनार एवं पौधारोपण कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
सेमिनार की अध्यक्षता ग्लोकल् विश्वविद्यालय की डी.एस.डब्लू डॉ. शोभा त्रिपाठी ने की। कार्यक्रम में डॉ. बिलाल अहमद एवं डॉ. जीशान खान मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। सेमिनार का विषय "पौधारोपण, पौधों का रखरखाव एवं उनके आयुर्वेदिक लाभ" था। कार्यक्रम का विषय प्रवर्तन करते हुए बड़कला वन क्षेत्र के रेंजर श्री बिशन सिंह यादव ने 1 जुलाई से 7 जुलाई तक मनाए जाने वाले वृक्षारोपण सप्ताह के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाना है। साथ ही उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय वृक्षारोपण आंदोलन की शुरुआत 1950 में तत्कालीन केंद्रीय कृषि और खाद्य मंत्री डॉ. के.एम. मुंशी (कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी) द्वारा की गई थी। हालाँकि, इस उत्सव की मूल नींव प्रख्यात वनस्पति विज्ञानी डॉ. एम.एस. रंधावा के प्रयासों से जुलाई 1947 में रखी गई थी, जब पहला वृक्षारोपण सप्ताह मनाया गया था। उन्होंने वृक्षारोपण सप्ताह की शुरुआत, इसकी पृष्ठभूमि तथा इसके पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व की भी विस्तार से जानकारी दी।अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शोभा त्रिपाठी ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, स्वास्थ्य और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला भी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहकर उनके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का भी संकल्प लेने का आह्वान किया।मुख्य वक्ता डॉ. बिलाल अहमद ने पौधों के रखरखाव एवं उनकी देखभाल के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला, जबकि आयुर्वेद के डॉक्टर डॉ. जीशान खान ने पौधों के औषधीय गुणों एवं स्वास्थ्य लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।सेमिनार के उपरांत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने वन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पौधारोपण किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में वन विभाग द्वारा प्रत्येक छात्र को एक-एक आम का पौधा भेंट किया गया, ताकि वे अपने घर अथवा आसपास उसे रोपित कर उसकी देखभाल करें और हरित पर्यावरण के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी, विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
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