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अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद ने की समस्याओं का समाधान करने की मांग

 अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद ने की समस्याओं का समाधान करने की मांग

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानद गिरि महाराज एवं स्वामी रामविशाल देव जी महाराज ने मेला प्रशासन से मांग की है कि अगामी कुम्भ मेला 2027अखाड़ा परिषद केन्द्रित न होकर आश्रम केन्द्रित हो। मेला के दौरान केवल कुछ ही संतो के आवभगत के बजाए सभी संतो का सम्मान बराबर है,समझकर कार्य और व्यवस्था करना चाहिए।

गुरूवार को दोनो संतो ने प्रैस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि सनातन धर्म की मजबूती के लिए दोनो अखाड़ा परिषद को एक होकर कार्य करना चाहिए।आश्रम धारी संतों की मांगों पर मेला प्रशासन को प्रमुखता से ध्यान देना चाहिए। आश्रमों के माध्यम से ही धार्मिक क्रियाकलाप संचालित होते हैं।कुंभ मेला एवं अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों में आश्रमों की विशेष भूमिका रहती है।स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने कहा कि व्यक्तिगत लाभ का मोह नहीं रखने वाले सामान्य संत समस्याओं से जूझते हैं।उन्होंने कहा कि आश्रम से कमर्शियल टैक्स वसूला जाना न्याय संगत नहीं है।कुंभ मेला 2027 को कुशलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए आश्रमों में रह रहे संतों की समस्याओं का समय रहते निदान होना चाहिए।पूर्व में भी समस्याओं को लेकर मेला अधिकारी को पत्र सोपा गया था। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले को संपन्न कराने में मनमर्जी नहीं चलेगी।बिजली,पानी,शौचालय, पार्किंग आदि की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाए।आश्रमधारी संत शासन से समन्वय स्थापित कर कुंभ मेले को कुशलता पूर्वक संपन्न कराने में भरपूर सहयोग करेंगे।रामविशाल दास ने कहा कि अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद का उद्देश्य सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार और आश्रमधारी संतों के संरक्षण संवर्धन में योगदान देना है।आश्रमधारी संतो को सम्मानजनक स्थान,प्रतिनिधित्व एवं सुविधाएं मिलनी चाहिए।उनकी समस्याओं को शासन प्रशासन गंभीरता से ले।उन्होंने बताया कि 19जून को मांगों को लेकर मेला प्रशासन को सौंपे गए पत्र पर शीघ्र सकारात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।रामविशाल दास महाराज ने कहा कि अखाड़ा परिषद के संतो को भी एकजुट हो जाना चाहिए।कुंभ मेले को कुशलता पूर्वक संपन्न करने के लिए संगठित रहने की आवश्यकता है।मतभेद बुलाकर एक हो जाने से समाज में भी सकारात्मक संदेश पहुंचेगा। आध्यात्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में आश्रमधारी संतों की महत्वपूर्ण भूमिका है।इस दौरान महामंडलेश्वर स्वामी सत्यव्रतानंद,स्वामी चंद्रभूषणनंद,स्वामी कमलेश महंत,ओमदास महाराज आदि मौजूद रहे।

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