वीरेन्द्र ‘आज़म’ की लघुकथाएं ‘भारत कथा कोश’ में शामिल
मंगलुरु विश्वविद्यालय में भी पढ़ाई जा रही हैं वीरेन्द्र आज़म की लघुकथाएं
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर- सहारनपुर के साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र आजम की लघुकथाएं ‘भारत कथा कोश’ में शामिल की गयी है। कोश में 21 भारतीय भाषाओं की चुनींदा लघुकथाएं को सम्मलित किया गया है। वरिष्ठ साहित्यकार बलराम के संपादन में यह लघु कथा कोश चार खण्डों में प्रकाशित किया गया है। इससे पहले लघुकथा संग्रह ‘‘कथा कौस्तुभ’’ में भी वीरेन्द्र आज़म की लघु कथाएं शामिल की जा चुकी है। उनकी लघुकथाएं मंगलुरु विश्वविद्यालय में बीसीए के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही हैं।
सर्वभाषा ट्रस्ट, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित ‘भारत कथा कोश’ में भारतेंदु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, हरिशंकर परसाई, माखनलाल चतुर्वेदी, शरद जोशी, ,राजेंद्र यादव, संजीव, उदय प्रकाश, गिरीश पंकज, सुभाष राय, कमलेश भट्ट कमल व बलराम आदि साहित्यकारों की लघुकथाओं के साथ डॉ. वीरेन्द्र आज़म की दो लघु कथाएं-‘‘धरती और आकाश’’ तथा ‘‘धैर्य और संतोष’’ को शामिल किया गया है। वीरेन्द्र आज़म की लघुकथाओं ‘धरती और आकाश’ में प्रकृति दर्शन है तो ‘धैर्य और संतोष’ में जीवन दर्शन है। लघु कथा ‘धरती और आकाश’ में धरती और आकाश दोनों में अपनी श्रेष्ठता को लेकर बहस हो जाती है, दोनों अनेक उदाहरणों के साथ अपने को श्रेष्ठ बताते है। बहस लंबी होती देख दोनों के बीच प्रवाहित हो रही वायु दोनों को उनके अपने महत्व के बारे में समझाती है। वायु समझाती है, तुममें एक अकेले के महत्व का कोई अर्थ ही नहीं है, तुम दोनों एक दूसरे के पूरक हो। वायु समझाती है, पूर्णता समग्रता में हैं। दूसरी लघु कथा ‘धैर्य और संतोष’ कोरोना काल पर अधारित है। एक सेठ, सड़क किनारे बैठे एक फकीर को भोजन का पैकेट देता है तो फकीर ये कहकर लेने से इंकार कर देता है, कि वह खाना खा चुका है। ‘रख लो, शाम को काम आयेगा’, सेठ के यह कहने पर फकीर कहता है कि ये पैकेट लेकर वह अपने जैसे किसी दूसरे का हक नहीं लेना चाहता। सेठ उसके धैर्य और संतोष पर सोचता रह जाता है।

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