अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा सर सैयद की याद में मनाया गया सर सैयद डे
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर-अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमनाई एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा ए एम यू के संस्थापक सर सैयद की याद में सर सैयद डे का कार्यक्रमअंबाला रोड स्थित होटल आयोजित किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में लेफ्टिनेंट कर्नल पूर्व वाइस चांसलर ए एम यू,श्री जमीरुद्दीन शाह रहे
कार्यक्रम में बोलते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल पूर्व वाइस चांसलर ए एम यू,श्री जमीरुद्दीन शाह ने कहा कि सर सैयद आधुनिक शिक्षा के संस्थापक और एक ऐतिहासिक शख्सियत थे जिन्होंने मुस्लिम समाज में फैले अंध विश्वासों को दूर करने के लिए तालीमी मिशन को आगे बढ़ाया और अलीगढ आन्दोलन की शुरआत की वो एक चिंतक, विचारक,लेखक पत्रकार,समाज सुधारक और दूरदर्शी व्यक्तिव के मालिक थे।आज भी ग़रीबी , अशिक्षा, अंध विश्वासों पर काम करने की जरूरत है। सभी शिक्षित व्यक्ति इस मिशन में अपनी भूमिका निभाए। रामपुर से आये विशिष्ट अतिथि पूर्व डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज श्री तनवीर अहमद ने कहा कि मुसलमानों में अशिक्षा, बेरोजगारी और अंधकार दूर करने के लिए सर सैयद ने एक अभियान शुरू किया आधुनिक शिक्षा का अभियान। यह दिन एक महान व्यक्ति , उसके विज़न उसके लगन और उसकी कुरबानियो और खिदमत को समझने का दिन है। ज़कात फंड से बहुत सारे ग़रीब बच्चों को पढ़ाया जा सकता है।जामिया मिलिया दिल्ली सेआये प्रोफेसर माजिद जमील ने कहा कि भारत में सुधारवादी आंदोलन का एक हिस्सा सर सैयद आंदोलन या अलीगढ़ आंदोलन है । उन्होंने बताया कि सहारनपुर में तालीमी बेदारी कैंप में ड्रॉप आउट बच्चों को तैयारी कराकर अलग अलग कोर्सेज की परीक्षा दिलवाई जाती है। पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने कहा कि नई शैक्षिक संस्थाएं खोलना सर सैयद को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हाफिज़ उस्मान ने कहा कि लंदन जाकर सर सैयद ने वहां की तहजीब और तालीम का जायज़ा लेकर यहां भारत में एक विश्वविद्यालय की स्थापना की। जिस से आज भी लाखों छात्र छात्राएं शिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं। मज़ाहिर राणा ने कहा कि शिक्षा के साथ राजनीतिक जागरूकता भी आवश्यक है। कॉलमनिस्ट डॉक्टर शाहिद ज़ुबैरी ने कहा कि जो शिक्षा पर काम हिंदू भाइयों ने सौ साल पहले शुरू किया था वही काम मुस्लिम समाज ने सौ साल बाद शुरू किया।अध्यक्षता कर रही डॉक्टर कुद सिया अंजुम ने कहा कि एक महान व्यक्तित्व की पहचान यह है कि वह ऐसी धरोहर छोड़ता है जो वक्त के साथ खत्म नहीं होती बल्कि इस पर भविष्य की तामीर होती हैं सर सैयद ने यही विजन समाज को दिया।यूनिवर्सिटी में सभी धर्मों के छात्र छात्राएं आरंभ से ही पढ़ते आ रहे हैं। हमे अधिक से अधिक पिछड़े इलाकों में स्कूल खोलने चाहिए कोई बच्चा ग़रीबी के कारण पढ़ाई से वंचित ना रहे। एजुकेशनल फंड से ग़रीब व मेहनती बच्चों की मदद की जाएगी। कार्यक्रम का संचालन करते हुए सचिव सुबुही इफ्तेखार ने एसोसिएशन द्वारा किये जा रहे कामों के बारे में विस्तार से बताया। एसोसिएशन ने ग़रीबों ओर महिलाओं के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीम्स के लिए जागरूकता कैंप , स्वास्थ्य कैम्प, सर कैम्प आयोजित किए एवं गरीब बच्चों को स्वेटर और मोज़े स्टेशनरी बांटे वा कुछ छात्र छात्राओं की फीस एसोसिएशन द्वारा दी गई ।इस अवसर पर कार्यकारणी समिति के सदस्यों अनवार अहमद, कामरान, अनस इक़बाल,नि म रा,गुलनाज, खलीक अहमद , हिना शाद, शबाना हंफी का विशेष सहयोग रहा । डॉक्टर अय्यूब, सलीम उर रहमान , साजिद, राव महबूब, फुरकान गुल, आसिफ शमसी साजदा,रहमान अजीज , नाहीद और बड़ी संख्या में अलीग मौजूद रहे। मेहमानों को मोमेंटो,पौधे व सिपासनामा पेश किया गया।अंत में अलीगढ़ यूनिवर्सिटी तराना यह मेरा चमन यह मेरा चमन तथा राष्ट्रीय गान सामूहिक रूप से गाया गया।



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