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हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम के ज़िक्र से मजलिसे बरपा

 हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम के ज़िक्र से मजलिसे बरपा

रिपोर्ट-अमान उल्ला खान

सहारनपुर-मोहर्रम की पहली तारीख को नगर के विभिन्न इमामबाड़ो मे हुई मजालिस मे मुस्लिम धार्मिक विद्वानो ने हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चचा ज़ात भाई हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम की शहादत का फलसफा बयान किया।मजलिस मे सब से पहले मरसिए खानी की गयी मरसिया पढने वालो मे आसिफ अल्वी, सलीस हैदर काजमी, हकमज़ा जैदी सलीम आब्दी, खुवाजा रईस अब्बास आदि थे।

पहली मजलिस मकान सैय्यद निसार हैदर काज़मी मरहूम पर हुई जिसको ईरान क़ुम से तशरीफ लाये, हुज्जत-उल इस्लाम आली जनाब मौलाना ज़हूर मेहदी मौलाई साहब ने खिताब फरमाया। दूसरी मजलिस इमामबाड़ा सामानियान मौहल्ला कायस्थान सहारनपुर में हुई जिसको दिल्ली से तशरीफ लाये, हुज्जत-उल इस्लाम आली जनाब मौलाना सज्जाद रब्बानी साहब ने खिताब फरमाया।तीसरी मजलिस बडा इमामबाड़ा जाफर नवाज़ में हुई जिसको ईरान क़ुम से तशरीफ लाये, हुज्जत-उल इस्लाम आली जनाब मौलाना ज़हूर मेहदी मौलाई साहब ने खिताब फरमाया। चौथी मजलिस छोटा इमामबाड़ा अन्सारियान में हुई जिसको दिल्ली से तशरीफ लाये, हुज्जत-उल इस्लाम आली जनाब मौलाना डाक्टर मेहदी बाकिर खान मेराज साहब ने खिताब फरमाया।  मजालिस मे हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम की शहादत पर शिया मुस्लिम धार्मिक विद्वानो ने बताया कि हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम को हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने करबला पहुचने से पहले सफीर (दूत) बनाकर कूफा भेजा था। इबने ज़ियाद जो कूफे का गर्वनर था ने हज़रत मुस्लिम को बन्दी बनाकर आप पर जुल्मो सितम (यातनाऐ दी) किया और बाद मे हज़रत मुस्लिम अलैहिस्सलाम को किले की दीवार से गिराकर शहीद कर दिया इबने ज़ियाद यजीद की हकूमत का गर्वनर था ।शिया मुस्लिम विद्वानो ने बताया कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने नाना रसूले खुदा स0अ0 के बताये गये अहिन्सा के रास्ते पर चलकर दुनिया को दिखा दिया की जुल्म के आगे मजलूमियत हमेशा से जीत ती आयी है। आज जिन जिन कौमो ने अहलेबेैेत का रास्ता अपनाया है वह आज भी आतकंवाद के खिलाफ है इस्लाम पर उंगली उठाने वालो को अहलेबैत के मानने वालो ने अहिंसात्मक तरिके से जवाब दिया है इस्लाम मे किसी की जान व माल को नुकसान पहुचाने की इजाज़त नही है जो लोग आतकवाद का रास्ता अपना रहे है वह इस्लाम के विरोधी है जो लोग रसूले खुदा व अहलेबैत के मानने वाले है वह आतकवाद के हमेशा से खिलाफ रहे है इसलाम के मायने शान्ति से है अमन से है इसलाम कहता है नेक बनो जिससे तुममे एकता आये और जब तुम नेक होगे तो तुममे कोई बुराई न रहेगी। मजालिस के आखिर मे नौहा खानी की गयी जिसमे अन्जुमने अकबरिया व अन्जुमने इमामिया व अन्जुमने सोगवारे अकबरिया ने नौहा खानी व सीनाज़नी की। मजलिस में फरहत मैहदी, चांद जैदी, डा0 जैड ए कौसर, एड0 मन्ज़र हुसैन काज़मी, इन्तेजार मैहदी, काज़ी अकरम, प्यारे मियां, सकलैन रज़ा, फरहत हुसैन, साजिद काज़मी, जैगम अब्बास, ज़िया अब्बास, रियाज़ हैदर, मिर्जा अहसान, अज़हर काज़मी, मेहताब अली, रियासत हवारी, आसिफ हवारी, फिरोज़ हैदर, ज़मीर काज़मी, सिबतैन रज़ा, कौसर अब्बास, समीर हैदर, नदीम जैदी, फराज़ जैदी, अली जै़ब काज़मी, बाकर रजा काज़मी, तहसीन काज़मी, मुन्तजिर मैहदी, किशवर मैहदी, शोजब रज़ा, इशरत हुसैन, अबुतालिब, डॉ0 एम एम जैदी, अरशद अज़ीज़, मीसम काज़मी सहीम काज़मी, नुसरत अज़ीज़, अनवार जैदी, तालिब जैदी, शबीह हैदर, अम्मार आब्दी  शादाब आब्दी आदि रहेे। 

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