सतगुरु रविदास आश्रम कोहड़ा बना गरीबों का सहारा, एक ही छत के नीचे परिणय सूत्र में बंधे नवविवाहित जोड़े
रिपोर्ट एसडी गौतम
नारायणगढ़- दुनियां में भाईचारे के संदेशवाहक, समता, समानता के वाहक, आध्यात्मिक जगत के महान साधक, महान दार्शनिक, अखंड ज्योति संतों में संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी महाराज की 649वीं जयंती के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय संत शिरोमणि सतगुरु रविदास मिशन गुरु गद्दी ऊन/शुक्रताल के संस्थापक संचालक, अध्यक्ष सतगुरु स्वामी समनदास जी महाराज की प्रेरणा व आशीर्वाद से आश्रम कोहड़ा में हर साल की तरह इस साल भी 121 कन्याओं का सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया।
आश्रम व्यवस्थापक संत राजकुमार दास ब्रह्मचारी ने बताया कि संत शिरोमणि सतगुरु रविदास जी महाराज की जयंती की खुशी में सतगुरु समनदास जी महाराज की दया मेहर से बिना किसी भेदभाव के यह नेक काम हो रहा है जिसमें सर्वसमाज की बेटियों के हाथ पीले कर एक ही छत के नीचे बैठाकर आपसी भाईचारे और एकता का संदेश दिया गया है। उन्होंने सभी से गुरुमार्ग पर चलकर समाज की बेहतरी के लिए योगदान देने की बात कही। मुख्य अतिथि जसबीर सिंह ठेकेदार मोहडीवाला ने व्यवस्थापक महात्मा राजकुमार दास ब्रह्मचारी और आश्रम कमेटी की प्रशंसा करते हुए हर संभव सहयोग देने की बात कहते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन होने से गरीबों को एक सहारा मिला है। सहारनपुर से पहुंचे भारतीय शिक्षा चैरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष/वरिष्ट समाजसेवी जयराम गौतम प्रधान ने नवविवाहित जोड़ो कों आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और समाजिक जीवन में संस्कारों के साथ अच्छी तरह से पालन करने की बात कहते हुए सभी से मृत्युभोज जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने की बात कही। साथ ही प्रशासन से उक्त कार्यक्रम में उचित व्यवस्था करते हुए आश्रम के लिए सुरक्षाकर्मी को मांग की। संचालन करते हुए एसडी गौतम "पत्रकार" ने बताया कि जगतगुरु रविदास जी महाराज की जयंती के अवसर पर अबकी बार भी यह भव्य आयोजन किया गया है जिसमें सभी धर्मों को ध्यान में रखते हुए रीतिरिवाज अनुसार जोड़ो को सामूहिक विवाह के बंधन में बांधा गया है और शगुन के तौर पर बेड, ड्रेसिंग, अलमारी, कुर्सी, मेज, अनाज टंकी व संदूक समेत रोजमर्रा की जरूरतों का समान उपहार में दिया गया है। उन्होंने सभी से गुरुजी के पदचिन्हों पर चलते हुए बाबासाहब डॉ. अंबेडकर, मान्यवर कांशीराम साहब और बाबू मंगूराम के विचारों पर चलने की बात कही। समारोह में हाबड़ी दरबार से पधारे संत खुशी दास व रामपाल सिंह गौतम ने भी विचार रखें। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों तथा सेवादारों को सरोपा पहनाकर उनका स्वागत किया गया। देर शाम दो दिन तक चले ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान आश्रम को भव्य रूप से सजाया गया था जिसमें डीजे की धुन और ढोल की थाप पर नाचते गाते हुए कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे और शादी के दौरान रिबन कटाई व जूते छिपाई जैसी सभी रस्में निभाई गई। भव्य रूप से सजा पंडाल और उसमें अनेकों प्रकार के बने व्यंजन अपनी खुशबू बिखेर रहे थे। इस दौरान सुरेन्द्र दास, सुखविंद्र सिंह फौजी, सिद्धार्थ गोंदवाल, विक्रम सिंह, निर्मल दास, बलबीर सिंह, करनैल सिंह, संजू हलवाई, रामकरण, भरतू, कौशल, कुलदीप सिंह, इशू नारायणगढ़, कृष्ण मिस्त्री, कमलप्रीत संधु, पिंका, प्रदीप लाला, आकाश, दीपक, रामनिवास, हर्ष, हेमंत, रविन्द्र, सचिन, सुरेश, मोहनलाल, ओमप्रकाश, रामफल, जीत, पीयूष, राजन, हनी, नेहा, भावना सिंह, ममता, सतविंदर, हीना, कोमल, अंजली, कविता, मंजीत कौर, सुनीता, उषा, फूलवती, किरण, महिंद्रों, कमलेश, पाल्लो, ओमवती, राधा व नमनप्रीत समेत हजारों की तादाद में साद संगत मौजूद रही।

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