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अवैध खनन से भरे वाहन रात के अंधेरे में लगा रहे दौड़,कार्रवाही का नहीं ख़ौफ़,क्या किसी का सरंक्षण है?मिलीभगत है या फिर लापरवाही?जाँच का विषय।

अवैध खनन से भरे वाहन रात के अंधेरे में लगा रहे दौड़,कार्रवाही का नहीं ख़ौफ़,क्या किसी का सरंक्षण है?मिलीभगत है या फिर लापरवाही?जाँच का विषय।

रिपोर्ट डाँ ताहिर मलिक/अमन मलिक

रामपुर मनिहारान कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों अवैध खनन का काला कारोबार पूरे शबाब पर है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि दिन ढलते ही कानून-व्यवस्था मानो दम तोड़ देती है और रात के अँधेरे में रेत-बजरी से लदे वाहन बिना किसी भय के सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं। सवाल यह नहीं है कि अवैध खनन हो रहा है, बल्कि असली सवाल यह है कि इतनी खुली छूट आखिर किसके इशारे पर दी जा रही है?

सरकार भले ही अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के दावे करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। खनन के लिए स्पष्ट नियम-कानून बनाए गए हैं, बिना अनुमति खनन अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे मामलों में वाहनों की जब्ती व कड़ी कार्रवाई का प्रावधान भी है। इसके बावजूद खनन माफिया निडर होकर अपने नेटवर्क को चला रहे हैं। स्थानीय लोगों और विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो रामपुर मनिहारान में अवैध खनन का खेल बेहद योजनाबद्ध तरीके से खेला जा रहा है। रात के समय बड़े वाहनों के साथ-साथ मैजिक (छोटा हाथी) जैसे छोटे वाहनों में भी रेत और बजरी भरकर सप्लाई की जा रही है। यह सब यूँ ही संभव नहीं लगता। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये वाहन कोतवाली क्षेत्र से होकर गुजरते हैं, फिर भी किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या अवैध खनन को किसी का संरक्षण प्राप्त है?या फिर संबंधित विभागों की घोर लापरवाही इस कारोबार को बढ़ावा दे रही है? अवैध खनन से न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुँच रही है। नदियों और खनन क्षेत्रों का संतुलन बिगड़ रहा है, सड़कों की हालत खराब हो रही है और भारी वाहनों की आवाजाही से आम जनता की जान जोखिम में पड़ रही है।अब क्षेत्रीय जनता की माँग है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच कराई जाए। साथ ही अवैध खनन में शामिल माफियाओं, वाहन स्वामियों और यदि कोई जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए।

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