राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर स्थानीय विद्यालय में महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन पर डाला प्रकाश
रिपोर्ट नदीम निजामी
नकुड़-राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर स्थानीय विद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान प्रधानाध्यापक कुलदीप सिंह रोहिला ने बच्चों को हॉकी खेलाते हुए भारत के महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के जीवन और उनके योगदान पर विस्तृत जानकारी दी।
प्रधानाध्यापक ने बताया कि मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद (प्रयागराज) में हुआ था। बचपन से ही उनका रुझान खेलों की ओर था। सेना में भर्ती होने के बाद उन्होंने हॉकी में अपनी प्रतिभा का ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरी दुनिया उन्हें हॉकी का जादूगर कहने लगी। ध्यानचंद ने 1928 से 1932 और 1936 में लगातार तीन ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। अपने करियर में उन्होंने लगभग एक हज़ार से अधिक गोल किए। उनकी खेल प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें 1956 में पद्मभूषण सम्मान से नवाज़ा गया। उनके सम्मान में दिल्ली का नेशनल स्टेडियम और देश का सर्वोच्च खेल सम्मान भी उनके नाम पर रखा गया है। प्रधानाध्यापक कुलदीप सिंह रोहिला ने कहा कि मेजर ध्यानचंद का जीवन हमें अनुशासन, मेहनत और देशभक्ति का संदेश देता है। खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि यह हमें स्वास्थ्य टीम भावना और आत्मविश्वास से भरने का माध्यम है। उन्होंने बच्चों से आह्वान किया कि वे खेलों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। जीवन में आगे बढ़ने के लिए मेजर ध्यानचंद से प्रेरणा लें। राष्ट्रीय खेल दिवस का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार बन गया। जहां उन्होंने हॉकी के साथ साथ खेलों के महत्व को भी समझा।
0 टिप्पणियाँ