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जागरूक महिला संस्था परचम द्वारा मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

जागरूक महिला संस्था परचम द्वारा मनाया गया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जागरूक महिला संस्था परचम द्वारा महिला दिवस के उपलक्ष में एक कार्यक्रम  अलअमीन स्कूल पुल कंबोह।न  में किया गया जिसकी अध्यक्षता स्कूल मैनेजर सलमान थानवी ने की व संचालन सीमा जहूर ने किया। 

कार्यक्रम में बोलते हुए रिचर्ची स्कूल की प्रिंसिपल खदीजा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस एक मजदूर आंदोलन के रूप में आरंभ हुआ 8 मार्च 1908 में न्यूयॉर्क शहर में इसकी शुरुआत हुई जब 15000 महिलाओं ने काम के कम घंटे और वोट के हक के लिए मार्च किया उनकी मांग थी कि 10 घंटे काम के बदले में उन्हें अच्छा वेतन दिया जाए इसके बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दी गई। रॉक वुड स्कूल प्रिंसिपल साजदा शाहिद ने कहा कि  महिला जिस समानता की हकदार है वह आज में भी उन्हें हासिल नहीं हुई है । कार्यक्रम संयोजिका डॉक्टर कुदसिया अंजुम ने कहा कि इस वर्ष का महिला दिवस का थीम है दान से लाभ, अधिकार न्याय और कार्यवाही सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए है। इस दिन का उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना है विज्ञान, राजनीति, कला ,खेल वा अन्य क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान को मान्यता देना है। यह दिन लैंगिक समानता वाली दुनिया को हासिल करने के लिए निरंतर सामूहिक  कार्यवाही की आवश्यकता को याद दिलाता है।   अध्यक्षता करते हुए स्कूल मैनेजर सलमान थानवी ने कहा की महिलाओं के हित में बहुत सारे कानून दहेज के खिलाफ कानून कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ कानून, लड़कियों की शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप पिता की जायदाद में बेटियों की हिस्सेदारी घरेलू हिंसा कानून बाल विवाह सती प्रथा के खिलाफ कानून बने हैं व सरकारी स्कीम्स वन स्टॉप सेंटर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और अपराध नियंत्रण कानून आदि लागू की गई है परंतु इसके बावजूद भी महिलाओं के खिलाफ अपराध रुक नहीं रहे हैं।सरकार को क़ानून तोड़ने वालों से सख़्ती से निमटना चाहिए ।  विशिष्ट अतिथि डॉक्टर शाहिद ज़ुबैरी ने कहा कि जिस समाज में आज भी महिलाएं महफूज नहीं हैं  समाज सभ्य समाज नहीं कहला सकता कवित्री सोफिया ज़ैदी के द्वारा एक सुंदर कविता पढ़ी गई "हौंसला है,उड़ान है,नारी की अपनी एक पहचान है,अब नहीं है वह अबला,वह तो पूरे जग की शान है।" संचालन करते हुए सीमा ज़हूर ने कहा कि  सरकार द्वारा जो सरकारी स्कीम महिलाओं के हित में बनाई गई हैं उनके लिए जागरुकता प्रोग्राम चलाया जाए और पुरुषों को संवेदनशील बनाने के लिए स्कूल कॉलेज में ऐसे कोर्स पढ़ाया जाए जहां महिलाओं के प्रति पुरुषों का व्यवहार और नजरिया बदले बुनियादी दिक्कत समाज की इस सोच को बदलने की है जो बेटियों को दो यम दर्जे का मानते हैं । कार्यक्रम के अंत में  दो प्रस्ताव पास किए गए पहला अमेरिका इजरायल और ईरान में चला युद्ध मानवता के लिए खतरा हे ओर मानव समाज के विकास में बाधा है युद्ध का सबसे ज़्यादा असर महिलाओं ओर बच्चों पर पड़ता है।इसलिए हम मांग करते हैं कि युद्ध शीघ्र अति शीघ्र बंद होना चाहिए दूसरा प्रस्ताव ईरान के स्कूल में छात्राओं पर बमबारी करके उनकी हत्या की गई जिसकी हम घोर निंदा करते हैं इसके लिए हम अमेरिका और इजरायल को दोषी मानते हैं।इसके अतिरिक्त  बुशरा परवीन , यासमीन सिद्दीकी, फरजाना,करीम बानो, मुनव्वर  आदि ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं व स्कूल स्टॉफ मौजूद रहे।

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