इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं को अवसर मिला,उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया-रेखा नेगी
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार।राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रेखा नेगी ने महिला दिवस पर कहा कि इतिहास में देखें तो महिलाओं को समाज में बराबरी का स्थान पाने के लिए लंबे संघर्ष करने पड़े हैं।आज यह दिन दुनिया भर में महिलाओं की सामाजिक,आर्थिक ,सांस्कृतिक और राजनीतिक उपलब्धियों को रेखांकित करने का अवसर बन गया है।इसका मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता को समाप्त करना और महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब महिलाओं को अवसर मिला,उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महिलाओं ने अंतरिक्ष की दूरियां नापीं।पी.वी.सिंधु, मैरी कॉम और मिताली राज ने तिरंगे का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया।आज महिलाएं बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सीईओ हैं और राजनीति में भी निर्णायक भूमिका निभा रही हैं।महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि महिलाओं का सशक्त होना समाज की प्रगति के लिए जरूरी है।हमें हर दिन यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाएं अपने जीवन में बिना किसी भेदभाव के आगे बढ़ सकें।भारतीय संस्कृति में नारी को उच्च स्थान प्राप्त है।प्राचीन शास्त्रों में कहा गया है-“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।”फिर भी सामाजिक इतिहास में कई कालखंड ऐसे रहे जब महिलाओं को शिक्षा और स्वतंत्रता से वंचित रखा गया।उन्नीसवीं सदी में सामाजिक सुधार आंदोलनों ने इस स्थिति को बदलने का प्रयास किया।इन आंदोलनों में कई महान व्यक्तित्वों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।राजा राम मोहन राय,ईश्वर चंद्र विद्यासागर और सावित्रीबाई फुले आदि के प्रयासों ने भारतीय समाज में महिला शिक्षा और अधिकारों के लिए नई चेतना पैदा की।इक्कीसवीं सदी ज्ञान और तकनीक की सदी है।इस युग में महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं है।महिला सशक्तिकरण के लिए शिक्षा का विस्तार,आर्थिक आत्म निर्भरता,राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक जागरूकता आवश्यक है।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हमें यह याद दिलाता है कि सभ्यता की यात्रा स्त्री और पुरुष दोनों के संयुक्त प्रयास से ही आगे बढ़ती है।नारी केवल संवेदना और करुणा की प्रतीक नहीं,बल्कि संघर्ष,साहस और नेतृत्व की भी मिसाल है।इसलिए 8मार्च केवल एक दिन नहीं,बल्कि एक विचार है-
0 टिप्पणियाँ