अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मुख्य समन्वयक का वैदिक रीति से स्वागत
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के दैनिक यज्ञ कार्यक्रम में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई),नई दिल्ली के मुख्य समन्वय अधिकारी डॉ.बुद्धा चन्द्रशेखर का माता लाल देवी यज्ञशाला में वैदिक रीति से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि वेद और श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को निष्काम कर्मयोग की प्रेरणा देते हैं।उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति के लक्ष्य पवित्र हों तो उन्हें प्राप्त करना सरल हो जाता है।कुलपति ने डॉ.बुद्धा चन्द्रशेखर के जीवन को प्रेरणास्रोत बताते हुए विद्यार्थियों से उनके आदर्शों का अनुसरण करने का आह्वान किया।कुलसचिव प्रो.सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि गुरुकुल एक पावन भूमि है, जो पिछले सवा सौ वर्षों से राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने के उद्देश्य से शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर योगदान दे रही है।उन्होंने कहा कि राष्ट्र सर्वस्व की भावना गुरुकुल की शिक्षा पद्धति का अभिन्न अंग है।मुख्य अतिथि डॉ.बुद्धा चन्द्रशेखर ने कहा कि गुरुकुल की पुण्य भूमि पर आकर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ है।उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है तथा वे भाषा की सीमाओं को तकनीक के माध्यम से समाप्त करने के लिए कार्य कर रहे हैं।डॉ.बुद्धा चन्द्रशेखर ने कहा कि माँ,मातृभूमि और मातृभाषा का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता और यही भाव भारत को विश्व गुरु बनाने की दिशा में अग्रसर करता है।कार्यक्रम में एफईटी के डीन प्रो.मयंक अग्रवाल ने डॉ.बुद्धा चन्द्रशेखर के शैक्षणिक एवं तकनीकी योगदानों की जानकारी दी।इस अवसर पर यज्ञ ब्रह्मा डॉ.वेदव्रत,डॉ.अंकित सैनी,डॉ.मनोज कुमार,डॉ.उधम सिंह,डॉ.सुशील कुमार,डॉ.संदीप कुमार,समीर राणा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक,कर्मचारी एवं छात्र उपस्थित रहे।
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