दिव्य शक्ति अखाड़े में दो नए महामंडलेश्वर शामिल, 154 संतों ने की पुष्प वर्षा
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
गुरुग्राम-दिव्य शक्ति अखाड़ा सहारनपुर और ब्रह्माकुमारीज़ दिल्ली जोन की ओर से गुरुग्राम में आयोजित अखिल भारतीय संत सम्मान समारोह में दो नए महामंडलेश्वरों का सुशोभन किया गया। सतना से आचार्य परमानंद जी महाराज और संत भूपेंद्रानंद स्वामी जी महाराज को विधि-विधान से महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई। देशभर से आए 154 संतों ने मंत्रोच्चारण और पुष्प वर्षा कर दोनों का स्वागत किया।अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर संत कमल किशोर जी महाराज ने कहा कि समाज में गिरते नैतिक मूल्यों को रोकने के लिए सभी संतों को भेदभाव भुलाकर तन-मन-धन से प्रयास करना होगा। तभी समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत कर पाएंगे। समाज आज भी संतों का आदर करता है और मार्गदर्शन लेता है।उन्होंने कहा कि ज्ञान समुद्र के समान है और मानव का मस्तिष्क गिलास के समान। गिलास में समुद्र नहीं भर सकते, लेकिन गिलास के जल को समुद्र में मिलाकर समुद्र बनाया जा सकता है। ज्ञान के अहंकार को त्याग और प्रेम के समुद्र में मिलाना ही परमात्मा को पाने का सरल साधन है।राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सपना दीदी ने कहा कि आत्मा के सात गुण ज्ञान, पवित्रता, प्रेम, शांति, सुख, आनंद और शक्ति हैं। इन्हीं गुणों से जीवन जीने पर आत्म संतुष्टि और अतीन्द्रिय सुख मिलता है।राजयोगी नारायण भाई ने कहा कि विचार एक महान शक्ति है। सकारात्मक विचार मानसिक शक्ति बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक विचार थकान और खोखलापन लाते हैं।नए महामंडलेश्वरों को पंचतीर्थी आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी रामदेव जी महाराज, पीताम्बरा विद्यापीठ के आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री जी, महामंडलेश्वर डॉ. सुरेंद्र शर्मा, अरविंदर शास्त्री, डॉ. रेखा बांका, जगदीश बेदी, प्रफुल्ल रंजन हलदर, सुनील शुक्ला, रामशंकर तिवारी, अखाड़ा संयोजक चंदन पाराशर, सुधीर मिश्रा, आचार्य रोहित कुमार, गुरु माता चेतना जी, संरक्षक युधिष्ठिर लाल बांका, आचार्य प्रवीण भान, महर्षि भारत भूषण, साध्वी अनीता जी और प्रवक्ता मनीषा ने प्रमाण पत्र, परिचय पत्र, त्रिशूल, अंग वस्त्र, रेहल, साधना दंडी, गंगोत्री जल, आसन देकर चादर ओढ़ाई और पुष्प वर्षा की।ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से ओम शांति रिट्रीट सेंटर की निर्देशिका बीके आशा दीदी, नारायण भाई, सपना दीदी, सहारनपुर केंद्र की संचालिका रानी दीदी, माउंट आबू से उषा दीदी और प्रयागराज से मनोरमा दीदी ने आशीर्वाद दिया। कार्यक्रम का संचालन रानी बहन ने किया।

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