शांतिकुंज एवं पतंजलि योगपीठ में मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-शासन के निर्देशों के अनुपालन एवं जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व गायत्री तीर्थ शांतिकुंज एवं पतंजलि योगपीठ में कार्यक्रम आयोजित किया गया।सोमनाथ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव प्रसारण कार्यक्रम देखा गया।इस अवसर पर गायत्री तीर्थ शांति कुंज में भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के अदम्य इतिहास का प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व मनाया गया।शांतिकुंज के अंतेःवासियों, कार्यकर्ताओं,देवसंस्कृति विवि परिवार सहित विभिन्न साधना सत्रों एवं प्रशिक्षण शिविरों में आये प्रशिक्षणार्थियों ने शोभायात्रा,रुद्राभिषेक,आरती एवं दीपोत्सव में भागीदारी की।वहीं संस्कृति मंत्रालय के अधिकारी गणेश चन्द्र पाण्डेय,सुरेन्द्र सिंह आदि भी उपस्थित रहे।
इस दौरान अपने संदेश में शांतिकुंज की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि सोमनाथ मंदिर आस्था का केंद्र है और भारत की सांस्कृतिक चेतना, आत्मगौरव और पुनर्जागरण का प्रतीक है।अनेक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद इसका पुनर्निर्माण भारतीय समाज की अटूट श्रद्धा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ.चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि सोमनाथ मंदिर का इतिहास हमें यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति को मिटाया नहीं जा सकता।यह पर्व केवल अतीत की स्मृति ही नहीं है,वरन् राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का अभियान है।उन्होंने युवाओं से भारतीय मूल्यों,संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह मंदिर भारत की आस्था, संघर्ष और पुनरुत्थान का प्रेरणास्रोत है।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्रीय एकता की भावना सुदृढ़ होती है।उल्लेखनीय है कि नरेन्द्र मोदी द्वारा विशेष पूजा-अर्चना के पश्चात देशभर में स्वाभिमान पर्व मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह पर्व 1000 वर्षों की अटूट आस्था का स्मरण कराता है और इसकी कल्पना सार्थक सांस्कृतिक जुड़ाव के लिए एक ऐसे मंच के रूप में की गई है जो न केवल राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करता है बल्कि भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान भी बढ़ाता है। पतंजलि योगपीठ में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें हवन,भाषण,रैली का आयोजन किया गया।कार्यक्रम में वर्निका एवं उत्कृषिणी ने सोमनाथ मंदिर के विषय में जानकारी दी तथा कार्यक्रम का महत्व बताया।इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्रोफेसर अनिल कुमार,वाइस प्रिंसिपल डा.गिरीश के.जे,डा.सी.बी धनराज तथा डिप्टी डायरेक्टर संस्कृति विभाग आशीष कुमार ,सुशील नौटियाल,मनोज जकमोला,गणेश पांडे,सुरेंद्र तथा आचार्य विक्रम सहित पतंजलि योगपीठ के छात्र छात्राएं संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।
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