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मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए दो दिवसीय संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा पर कार्यशाला

 मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए दो दिवसीय संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा पर कार्यशाला

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- कन्या गुरुकुल हरिद्वार के मनोविज्ञान विभाग में दो दिवसीय संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (सी.बी.टी) पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सीबीटी की मूल अवधारणाओं तकनीकों तथा उनके व्यवहारिक उपयोग से अवगत कराना था।

संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा एक प्रकार की लक्ष्य उन्मुख मनोचिकित्सा है जिसका उद्देश्य विचारों भावनाओं और व्यवहार के अनुपयुक्त पैटर्न को बदलना है।यह मानसिक समस्याओं के समाधान के लिए समस्या केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाती है।पहले दिन छात्राओं के साथ संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा के सैद्धांतिक पहलुओं पर चर्चा की गई। सी.बी.टी का मूल सिद्धांत यह है कि घटनाये हमें सीधे परेशान नहीं करती, बल्कि उन घटनाओं के बारे में हमारी सोच हमें प्रभावित करती है।इसके लिए सर्वप्रथम घटना से संबंधित स्वचालित नकारात्मक विचारों को पहचानना आवश्यक है जो अवसाद या चिंता को बढ़ाते हैं इसके पश्चात अस्वस्थ या अतार्किक सोच को चुनौती देना और उन्हें अधिक सकारात्मक व यथार्थवादी विचारों से बदलना होता है इसे संज्ञानात्मक पुनर्गठन करना कहते हैं। संज्ञानात्मक विकृतियों जैसे अतिश्योक्ति,नकारात्मक निष्कर्ष निकलने को प्रतिभागियों को उदाहरण और केस स्टडी के माध्यम से समझाया गया।कार्यशाला के दूसरे दिन व्यावहारिक प्रशिक्षण पर मुख्यतः ध्यान केंद्रित किया गया। छात्राओं को विचारों को रिकॉर्ड बनाना,विचारों का पुनर्गठन करना व्यवहार का क्रियान्वयन,भूमिका निर्वाहन और समूह गतिविधियों के माध्यम से और समस्या समाधान तकनीको का उपयोग कैसे करना है इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।सीबीटी को दैनिक जीवन और काउंसलिंग में कैसे प्रयोग करना है.यह विभिन्न उदाहरणों द्वारा बताया गया।छात्राओं ने संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा के विशेषज्ञ निधि कोठियाल से चिकित्सा संबंधित विभिन्न प्रकार के सवाल पूछ कर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। अंत में डॉक्टर सुनीता रानी ने विभाग की तरह से निधि कोठियाल का धन्यवाद किया । छात्राओं को अवश्वासन दिया गया कि भविष्य में अधिक प्रयोगिक सत्र वास्तविक जीवन के केस स्टडी और उन्नत सी.बी.टी.कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।कार्यशाला में डॉक्टर ऋचा सक्सैना,डॉक्टर पारूल मलिक शोध छात्रा भव्या अरोड़ा,मणिका व प्रयोगशाला असिस्टेंट दीपा साहू व प्रयोगशाला सहायक हरिराम का सहयोग रहा।



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