जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की सख्ती
निजी विद्यालयों की मनमानी फीस पर शिकंजा,अतिरिक्त वसूली लौटाने के आदेश
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
नैनीताल-भीमताल-हल्द्वानी- नैनीताल जनपद में निजी विद्यालयों द्वारा विभिन्न मदों में अनाधिकृत शुल्क वसूले जाने तथा अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाले जाने पर शिकायतों पर जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने कड़ा रुख अपनाया है।
जिलाधिकारी के अनुमोदन के उपरान्त मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल द्वारा सभी निजी विद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण एवं वसूली सम्बन्धी विस्तृत निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन की इस कारवाई से हजारों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।मुख्य शिक्षा अधिकारी ने बताया कि कई विद्यालय शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त प्रवेश शुल्क,विकास शुल्क, परीक्षा शुल्क तथा अन्य विभिन्न मदों में मनमाने ढंग से शुल्क वसूल रहे थे।जारी आदेश के अनुसार प्रवेश शुल्क किसी भी स्थिति में अत्यधिक नहीं होगा तथा केवल वास्तविक एवं औचित्यपूर्ण व्यय के आधार पर ही लिया जा सकेगा।शिक्षण शुल्क एवं परीक्षा शुल्क के अतिरिक्त लिए जाने वाले विभिन्न शुल्कों को समायोजित कर केवल विकास शुल्क के रूप में निर्धारित किया जाएगा,जिसे न्यूनतम रखा जाएगा तथा उसका अनुमोदन अभिभावक-शिक्षक संघ से प्राप्त करना अनिवार्य होगा।किसी अन्य नाम से अतिरिक्त शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं होगी।आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि राज्य सरकार द्वारा बोर्ड से सम्बद्धता हेतु एन.ओ.सी.की शर्तों के अनुसार निजी विद्यालय तीन वर्षों की अवधि में कुल अधिकतम 10 प्रतिशत शुल्क वृद्धि ही कर सकेंगे और इसके लिए भी की स्वीकृति आवश्यकीय होगी। मनमानी शुल्क वृद्धि को नियमों का उल्लघंन माना जाएगा।परीक्षा शुल्क का निर्धारण प्रश्नपत्र,उत्तर पुस्तिका एवं अन्य सामग्री की वास्तविक लागत के आधार पर किया जायेगा। किसी भी दशा में उच्चतम कक्षा के लिए परीक्षा शुल्क रू.600/-(रू. छःसौ मात्र) से अधिक नहीं होगा,वहीं स्थानान्तरण प्रमाण पत्र शुल्क मात्र रू.1/-(रू. एक मात्र) निर्धारित किया गया है।अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विद्यालयों को शुल्क भुगतान की मासिक ,त्रैमासिक,छमाही अथवा वार्षिक व्यवस्था वैकल्पिक रूप से उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये हैं। किसी भी अभिभावक को एकमुश्त शुल्क जमा करने के लिए बाध्य नहीं किया जायेगा एवं शुल्क की रसीद अनिवार्य रूप से दी जायेगी।आदेश का सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में विभिन्न मदों में वसूले गए अतिरिक्त शुल्कों का समायोजन 01जुलाई 2026के शिक्षण शुल्क में किया जायेगा। यदि अतिरिक्त वसूली गयी राशि जुलाई माह के शुल्क से अधिक होगी तो शेष धनराशि आगामी माहों के शुल्क में समायोजित करनी होगी ।सभी विद्यालयों को किये गये समायोजन की प्रमाणित विवरण आदेश जारी होने के 07दिवस के भीतर शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराना होगा।जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा।मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविन्द राम जायसवाल ने चेतावनी दी है कि आदेशों का उल्लघंन करने वाले विद्यालयों के विरूद्ध आर.टी.ई.एक्ट के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत रू.1.00लाख (रू.एक लाख मात्र),एवं सी.बी.एस.ई.बॉयलाज के सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत रू.5.00लाख(रू.पाँच लाख मात्र)का आर्थिक दंड,मान्यता प्रत्याहरण,एन.ओ.सी.निरस्ती करण तथा शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 एवं अन्य प्रचलित नियमों के तहत कठोर वैधानिक कारवाई की जायेगी।
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