विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहा उत्तराखंड- प्रदीप बत्रा
21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का देहरादून में भव्य शुभारंभ हुआ
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
देहरादून-उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) द्वारा विज्ञान धाम,देहरादून में 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।सम्मेलन का उद्घाटन सत्र विज्ञान,प्रौद्योगिकी,अनुसंधान एवं नवाचार के माध्यम से राज्य और देश की प्रमुख चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण रहा।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के तौर पर कहा कि विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उत्तराखंड तेजी से विकास कर रहा है.उन्होंने कहा हमें अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं की पहचान कर उनके वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में कार्य करना चाहिए।उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग,अनुसंधान तथा नवाचार को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर बल दिया।इस अवसर पर यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो.दुर्गेश पंत ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति 2026 के प्रमुख उद्देश्यों तथा इसके अंतर्गत विज्ञान,अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में समन्वय,ज्ञान के आदान-प्रदान तथा वैज्ञानिक अनुसंधान को समाज की आवश्यकताओं से जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला।साथ ही,उन्होंने ‘विज्ञान सेतु’ पहल के बारे में जानकारी देते हुए विज्ञान एवं समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने,वैज्ञानिक ज्ञान एवं उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में ऐसी पहलों की भूमिका को रेखांकित किया।उद्घाटन सत्र में मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.नवीन चंद्र लोहनी,सीएसआईआर भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी),देहरादून की निदेशक डॉ.दर्शना जोशी,विज्ञानशाला के निदेशक केशव आशीष तथा विज्ञान भारती के संगठन मंत्री सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।इस अवसर पर सम्मेलन की सार-संक्षेप पुस्तिका का विमोचन भी किया गया। तकनीकी सत्रों में कृषि विज्ञान,वनस्पति विज्ञान,पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी;जैव प्रौद्योगिकी,जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान;रासायनिक विज्ञान;भू-विज्ञान;इंजीनियरिंग विज्ञान,पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी;गृह विज्ञान,स्वास्थ्य एवं पोषण;गणित एवं सांख्यिकी;कंप्यूटर विज्ञान एवं उभरती प्रौद्योगिकियाँ; तथा‘वर्ष का सर्वश्रेष्ठ नवाचारकर्ता’ श्रेणी को शामिल किया गया।सम्मेलन में विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों, अंतर्विषयक अनुसंधान, नवाचार-आधारित विकास तथा हिमालयी क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों एवं संभावनाओं के समाधान में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका पर बल दिया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान ‘विज्ञान,प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति विकसित भारत,सशक्त उत्तराखंड 2047’ विषय पर विचार-मंथन सत्र आयोजित किया गया।इस सत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार की भावी दिशा,राज्य के विकास में अनुसंधान की भूमिका तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विमर्श किया गया।सम्मेलन के अंतर्गत द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग का भी आयोजन किया गया,जिसमें कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी मुख्य अतिथि रहे।इस पहल का उद्देश्य प्रतिभागियों,विशेषकर युवाओं में विज्ञान के प्रति रुचि,सहभागिता एवं वैज्ञानिक गतिविधियों के प्रति उत्साह को बढ़ावा देना है।इसके माध्यम से विज्ञान को अधिक संवादात्मक ,रोचक एवं सहभागितापूर्ण बनाने का प्रयास किया जा रहा है।सम्मेलन में ‘लैब ऑन व्हील्स ’अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।यह पहल वैज्ञानिक प्रयोगों, गतिविधियों एवं ज्ञान को व्यापक स्तर पर पहुँचाने तथा विद्यार्थियों एवं आमजन में वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।सम्मेलन परिसर में 60से अधिक वैज्ञानिक एवं शिक्षण संस्थानों तथा स्टार्टअप्स द्वारा प्रदर्शनी भी लगाई गई।21वाँ उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन राज्य के वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।यह सम्मेलन अनुसंधान,शिक्षा, शासन,उद्योग,मीडिया एवं नवाचार से जुड़े विभिन्न हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।सम्मेलन में लगभग 1,000 शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों,शिक्षाविदों,विद्यार्थियों,नवाचारकर्ताओं,नीति-निर्माताओं,प्रशासनिक अधिकारियों ,उद्यमियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने सहभागिता की

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