सरकार छोटे मंझलें निजी स्कूलों को बिजली पानी निशुल्क दें-डॉ मलिक
रिपोर्ट-अमान उल्ला खान
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अशोक मलिक ने कहा कि आरटीई के अंतर्गत 25% निशुल्क गरीब दुर्बल वर्ग के बच्चों को वर्ष 2016 से 2023 तक निशुल्क पढ़ाया जा रहा है लेकिन शासन ने पर्याप्त धनराशि न होने के कारण गत वर्षो से आधा अधूरा भुगतान किया गया है शिक्षा विभाग द्वारा जांच करा कर जो स्कूल फीस प्रतिपूर्ति से वंचित रहे हैं उन सभी स्कूलों को बकाया भुगतान दिलया जाए ग्रामीण आंचल के पिछड़े क्षेत्र और शहरी क्षेत्र के गली मोहल्ले के छोटे मंझलें स्कूलों में कंप्यूटर लैब की व्यवस्था नहीं होती स्कूल संचालक आर्थिक तंगी से जूझते हैं इन स्कूलों में गरीब व मध्यम वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं स्कूली बच्चों से फीस भी सूक्ष्म सी ली जाती है और शिक्षकों को मानदेय निम्न स्तर का दिया जाता है इस प्रकार निजी स्कूलों में कंप्यूटर लैब व लैपटॉप और कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था की जाए ताकि यू डाइस प्लस पर बच्चों को ऑनलाइन सहित अन्य सभी कार्य किया जा सके आरटीई के निशुल्क बच्चे शिक्षा विभाग के द्वारा निजी स्कूलों पर थोपे जाते हैं जो कि विभाग के बच्चे हैं सूचनाओं व जांचों के नाम पर समय की बर्बादी के उपरांत मानसिक आर्थिक शोषण किया जाता है इस पर तत्काल विराम लगाना चाहिए श्री मलिक ने कहा कि निजी स्कूल स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा नो प्रॉफिट नो लॉस बिना लाभ हानि पर छोटे मंझलें स्कूल संचालित होते हैं जिन्हें LMV4 मैं चार गुना कमर्शियल बिजली के बिल और नगर निगम व नगर पंचायत विभाग द्वारा हाउस टैक्स जलकर को वहन नहीं कर सकते इसलिए जनहित में निजी स्कूलों को निशुल्क बिजली पानी उपलब्ध कराया जाए जिला अध्यक्ष केपी सिंह महानगर अध्यक्ष गुरु आलम प्रभारी अजय सिंह रावत ने कहा कि निजी स्कूलों की 3 वर्ष के लिए अस्थाई मान्यता दी जाती है इसके उपरांत नवीनीकरण मैं भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है इस प्रकार मान्यता प्रथम वर्ष में ही स्थाई मान्यता दी जाए स्कूल वैन का परमिट फिटनेस और बीमा जनहित में निशुल्क होना चाहिए मंडल उपाध्यक्ष प्रवीण गुप्ता रविंद्र गुप्ता और मुजाहिद नदीम ने कहा कि निजी स्कूल अभिभावकों द्वारा दी जाने वाली फीस से ही संचालित होते हैं और ऐसी स्थिति में जो अभिभावक अपने बच्चों की फीस नहीं देते हैं उनके विरुद्ध फीस वसूली का कानून बनाया जाय क्योंकि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को प्रेशराइज (दबाब ) बनाया जाता है की बच्चों के एग्जामिनेशन परीक्षा भी ले और उसे स्कूल से भी ना निकाले इसके विपरीत स्कूलों के संचालको पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है जो कि न्याय उचित नहीं है,शासन द्वारा अभिभावकों को ड्रेस व किताबों की प्रतिपूर्ति रुपए 5 000 राशि दी जाती है वह पेरेंट्स के अकाउंट में ट्रांसफर किया जाए जिससे कि वह अपने बच्चों की ड्रेस व किताबें समय से ले सकें मुक्तिदेर हसन व एडवोकेट मुकुल गुप्ता ने कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी शिक्षक जैसा सम्मान मिलना चाहिए राष्ट्रपति अवार्ड और राज्यपाल अवार्ड के असली हकदार निजी स्कूलों के शिक्षक है जो 95% सरकारी व गैर सरकारी आमजन के बच्चो को पढाने का काम करते हैं निजी स्कूलों की सुरक्षा हेतु सुरक्षा कानून बनाकर आयोग का गठन किया जाय अमजद अली एडवोकेट प्रदेश सचिव अशोक सैनी मंडल अध्यक्ष मुजाहिद नदीम एडवोकेट अदनान प्रवीण गुप्ता मंडल उपाध्यक्ष गययूर आलम महानगर अध्यक्ष अजय सिंह रावत महानगर प्रभारी मुकुल गुप्ता नकुल खन्ना मुक्तदिर हसन श्रीमती उमा बाटला श्री केवल कृष्ण नरेश वर्मा श्रीमती कविता श्रीमती प्रिया रानी कुमारी अंजना प्रणव अब्दुल सत्तार विनोशीराम आदि उपस्थित रहे

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