विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया, रखा गया मौन
विभाजन से संबंधित अभिलेखों की लगायी गयी प्रदर्शनी, दिखाई गई लघु फिल्म
रिपोर्ट-अमान उल्ला खान
देश का विभाजन किसी विभीषिका से कम नहीं था। भारत के लाखों लोगों ने बलिदान देकर आजादी प्राप्त की थी, ऐसे समय पर देश का दो टुकडों में बंट जाने का दर्द आज भी लाखों परिवारों में एक गहरे जख्म की तरह घर कर गया है। इसी समय बंगाल का भी विभाजन हुआ जिसमें बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग का पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया था जो कि सन् 1971 में बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र राष्ट्र बना। भारत के इस भौगोलिक बंटवारे ने देश के लोगों को सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक तथा मानसिक रूप से झकझोर दिया था। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें न सिर्फ भेद-भाव, वैमनस्य एवं दुर्भावना को खत्म करने की याद दिलाता है बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तिकरण की प्रेरणा मिलती है।इस अवसर पर विभाजन विभीषिका से संबंधित गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसके अन्तर्गत भारत के सामाजिक सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास में विस्थापितों का योगदान एवं देश की एकता एवं अखण्डता पर शरणार्थी व्यक्तियों के योगदान पर चर्चा की गयी। इसके साथ ही विभाजन से जुडी हुयी पुस्तकों को भी प्रदर्शनी में प्रदर्शित किया गया। आईएमए भवन में त्रासदी से संबंधित एवं अन्य वरिष्ठ नागरिकों को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया गया। विभाजन की विभीषिका को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का उपस्थित सभी ने अवलोकन किया। कार्यक्रम में श्री गुरुचरण सिंह, श्री प्रेम नाथ छोकरा, श्री सुभाष मनचंदा, श्री जेएस बाजवा, श्री हरजीत सिंह, श्री सुरेन्द्र शर्मा, श्री अनिल बलूजा, श्रीमती किरण कौर, सरदार सुरेन्द्र सिंह, श्री जीएल सलूजा, श्री आरसी शर्मा, डॉ0 एसके अग्रवाल को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर सिटी मजिस्ट्रेट श्री गजेन्द्र कुमार, श्री के0एल0अरोडा, श्री सुपनीत सिंह, जिला सूचना अधिकारी श्री दिलीप कुमार गुप्ता, तहसीलदार श्री अमित कुमार आदि उपस्थित रहे।


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