प्रत्येक जीव को रुद्राक्ष धारण अवश्य करना चाहिए-स्वामी कालेंद्रानंद
रिपोर्ट-अमान उल्ला खान
महादेव पर रुद्राक्ष श्रृंगार की महिमा का वर्णन करते हुए स्वामी कालेंद्रानंद जी महाराज ने कहा रुद्राक्ष शिव के नेत्रों से बहे हुए अश्रु रूप होकर धरा पर गिरे हुए हैं जो कालांतर में रुद्राक्ष कहलाए रुद्राक्ष भगवान शिव के ही परम अंश माने जाते हैं जिसको धारण करने से शिव की अखंड कृपा प्राप्त होती है भगवान भोलेनाथ के रूपों का वर्णन कोटी रूद्र संहिता में असंख्य रूपों में आता है इस आधार पर रुद्राक्ष भी एक मुखी से लेकर 16 मुखी तक आते हैं भगवान का विकराल रूप 16 मुख और 18 भुजाओं वाला है अर्थात रुद्राक्ष स्वयं भगवान भोलेनाथ का साक्षात स्वरूप है जिसको धारण करने से जीव को भक्ति विरक्ति मुक्ति एवं सद्गति की प्राप्ति होती है महाराज श्री ने कहा रुद्राक्ष में स्वयं भगवान भोलेनाथ रुद्र के अक्ष के रूप में वास करते हैं जो सभी का कल्याण करते हैं इसलिए प्रत्येक जीव को रुद्राक्ष धारण अवश्य करना चाहिए,51000 रुद्राक्ष पूजा भगवान विष्णु जी के द्वारा की गई जिसके फल स्वरुप उन्हें शिव की अनन्य कृपा प्राप्त हुई इसलिए प्रत्येक जीव को शिव की शरणागति होकर भगवान को रुद्राक्ष अर्पण कर फिर उसे भगवान से प्राप्त कर धारण करना चाहिए जिसमें जीव का कल्याण निश्चित है इस अवसर पर मेहर चंद जैन राजेंद्र धीमान अश्विनी कंबोज सागर गुप्ता मनोज चौहान दिनेश ठाकुर राकेश राय रामगोपाल कश्यप अजब सिंह चौहान रमेश शर्मा वर्षा किरण बबली बिना महिमा राजबाला बबीता रेखा उमा संतोष आदि भारी संख्या में भगवान भोलेनाथ की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया

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