सपा नेता आफताब लाल ने किया आज़ाद भारत सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित मुशायरे का उद्घाटन
'हमारे ज़र्फ़ की कोई मिसाल क्या होगी।तुझे भी भूल गए हम तेरी ख़ुशी के लिए-ताहिर मलिक
रिपोर्ट -डॉ0 ताहिर मलिक
रामपुर मनिहारान-आज़ाद भारत सामाजिक संगठन द्वारा आयोजित मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
मौहल्ला महल में स्थित हबीब रेस्टोरेंट में आयोजित मुशायरे का उद्घाटन वरिष्ठ सपा नेता आफताब लाल ने किया, शमा रोशन मशहूर शायर तारिक रामपुरी ने की,सदारत सूफी शाह आलम ने की, संचालन नसीम आजाद ने किया, नाते पाक से आगाज फुरकान अहमद ने किया।तारिक़ रामपुरी ने अपना कलाम पेश करते हुए कहा 'बदगुमानी की कोई दवा ही नहीं, उसने वो सुन लिया जो कहा ही नहीं।कर लिया हर तरह से गुना भाग भी,एक ग़म के सिवा कुछ बचा ही नहीं।ताहिर मलिक रामपुरी ने कहा 'हमारे ज़र्फ़ की कोई मिसाल क्या होगी।तुझे भी भूल गए हम तेरी ख़ुशी के लिए।तन्हा मलिक रामपुरी ने अपना कलाम पढ़ा 'मौला हमारा अक्स हमारा नहीं रहा, अब इस जहाँ में कोई सहारा नहीं रहा। नसीम आजाद रामपुरी ने अपना कलाम कुछ यूं पेश किया 'फाके पे फाके कर लिए ऐसा नहीं किया,दर पर अमीर ज़ादों के सजदा नहीं किया।आरिफ़ तन्हा ने कुछ यूँ कहा 'इश्क़ ने कर दिया मुझे पागल,इसको समझा था दिल्लगी मैंने।ग़ालिब हबीब ने यूँ कहा 'क्या अजब चीज़ है मुहब्बत भी,तुमसे रूठूँ तुम्हें मनाऊँ भी।सूफी शाह आलम,फुरकान अहमद आदि ने भी अपने कलाम पेश किए।तारिक़ रामपुरी को सम्मानित किया गया।इस दौरान डॉ मेहरबान मलिक, अनीस उमर,शारिक अंसारी एडवोकेट, कारी शादाब,नाजिम सैफी,अब्दुल मलिक,शाहबाज अंसारी, मोहम्मद नफीस, अब्दुल्ला, हाजी इरशाद मलिक,शमशाद पीर जी, अमजद मलिक मौजूद रहे।आखिर में प्रोग्राम के कन्वीनर ग़ालिब हबीब ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
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