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ग्लोकल विश्वविद्यालय ने रायपुर गांव में किया गया राष्ट्रीय सेवा योजना का एक दिवसीय शिविर का आयोजन

ग्लोकल विश्वविद्यालय ने रायपुर गांव में किया गया राष्ट्रीय सेवा योजना का एक दिवसीय शिविर का आयोजन

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर-ग्लोकल विश्वविद्यालय के अतिरिक्त प्रतिकुलाधिपति श्री सैयद निजामुद्दीन और कुलसचिव प्रोफेसर शिवानी तिवारी की प्रेरणा से रायपुर गांव में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के अंतर्गत एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर डॉ. शोभा त्रिपाठी एवं जमीरुल इस्लाम के निर्देशन में संपन्न हुआ। शिविर का मुख्य विषय नारी सशक्तिकरण और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत वंदना से हुआ तथा समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ग्लोकल वोकेशनल स्टडी स्कूल की डीन डॉ. रेशमा ताहिर रहीं। इस अवसर पर ग्राम प्रधान श्री राव अब्दुल कादिर ने विशेष सहयोग प्रदान किया।  डॉ रेशमा ताहिर ने अपने संबोधन में कहा कि स्त्रियों के संदर्भ में गुड टच और बैड टच की समझ अत्यंत आवश्यक है। गुड टच वह स्पर्श होता है जिसमें सम्मान, सहमति और संवेदनशीलता निहित हो, जिससे स्त्री को सुरक्षा, अपनापन और आत्मसम्मान की अनुभूति हो। इसके विपरीत बैड टच वह होता है जो बिना सहमति के किया जाए, जिससे स्त्री को असहजता, भय या अपमान महसूस हो। प्रत्येक स्त्री को यह अधिकार है कि वह अपने शरीर और सीमाओं की रक्षा करे, अनुचित स्पर्श का विरोध करे और आवश्यकता पड़ने पर निडर होकर सहायता मांगे। समाज का दायित्व है कि वह स्त्रियों के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोपरि रखे। 
डॉ फहीम अख़्तर ने अपने वक्तव्य में कहा कि नारी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ तभी पूर्ण होता है जब महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और शारीरिक रूप से सक्षम हों। आर्थिक सशक्तिकरण स्त्रियों को अपने निर्णय स्वयं लेने, सम्मानजनक जीवन जीने और किसी पर निर्भर न रहने की शक्ति देता है, जबकि शारीरिक सशक्तिकरण उन्हें आत्मरक्षा, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास प्रदान करता है। जब महिलाएँ शिक्षा, रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं तथा स्वास्थ्य, व्यायाम और आत्मरक्षा के द्वारा शारीरिक रूप से सशक्त होती हैं, तब वे न केवल स्वयं सुरक्षित रहती हैं बल्कि परिवार और समाज को भी सुदृढ़ बनाती हैं। सशक्त नारी ही सशक्त समाज और राष्ट्र की आधारशिला होती है।
ग्राम प्रधान ने अपने वक्तव्य में कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने का संदेश देता है। बेटियों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित कर हम उन्हें आत्मनिर्भर, सशक्त और आत्मविश्वासी बना सकते हैं। शिक्षित बेटी न केवल अपना भविष्य संवारती है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बेटियों को सम्मान और अवसर देना ही एक सशक्त भारत की पहचान हैं। इसके उपरांत छात्रों ने घर-घर जाकर बेटियों के शिक्षा के महत्व को बताया। अंत में डॉक्टर शोभा त्रिपाठी ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया और श्री जमीरुल इस्लाम ने सभी को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। इस कार्यक्रम में सभी स्वयंसेवकों ने अत्यंत उत्साह पूर्वक सहभागिता की।

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