समारोह पूर्वक मनाया गया निरंजन पीठाधीश्वर का सन्यास दीक्षा और अवतरण दिवस
रिपोर्ट श्रवण झा
हरिद्वार- निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज का पांचवा सन्यास दीक्षा और अवतरण दिवस गुरूवार को समारोह पूर्वक मनाया।जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज की अध्यक्षता में श्रीदक्षिण काली मंदिर में आयोजित भव्य समारोह में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद एवं मनसा देवी मंदिर के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी, जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी,पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ,आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी,आचार्य लोकेश मुनि,स्वामी चिदानंद सरस्वती, स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी सहित तमाम प्रमुख संत और राजनीति,समाजसेवा,प्रशासनिक सेवाओं तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्य लोगों ने स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज को बधाई और शुभकामनाएं दी।
स्वामी कैलाशानंद गिरी को सन्यास दीक्षा और अवतरण दिवस की बधाई देते हुए जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज विद्वान संत हैं।सनातन धर्म संस्कृति के देश दुनिया में प्रचार प्रसार में अहम योगदान कर रहे हैं,उनका जीवन सभी के लिए प्रेरणादायी है।अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय सनातन का समय है।संत महापुरूषों के सानिध्य में सनातन धर्म की पताका पूरे विश्व में फहरा रही है।जिसमें निरंजन पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार के साथ श्रद्धालु भक्तों को धर्म और अध्यात्म का ज्ञान प्रदान कर कल्याण के मार्ग पर अग्रसर करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ,जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी एवं आनंद पीठाधीश्वर स्वामी बालकानंद गिरी महाराज ने भी स्वामी कैलाशानंद गिरी को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि योग्य शिष्य ही गुरू की कीर्ति को आगे बढ़ाते हैं।उन्हांेने कहा कि स्वामी कैलाशानंद गिरी का जप तप पूरी दुनिया के लिए चमत्कार से कम नहीं है।विधानसभा अध्यक्ष रितु खंडूरी ने स्वामी कैलाशानंद गिरी को बधाई देते हुए कहा कि संत महापुरूषों के सानिध्य में कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है।उन्होंने संत महापुरूषों से आशीर्वाद भी लिया।समस्त संतों व अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि गुरू ही परमात्मा का दूसरा स्वरूप हैं।पूज्य गुरू के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए निरंजनी अखाड़े की परंपरांओं को आगे बढ़ाने के साथ समाज को धर्म और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करना ही उनके जीवन का लक्ष्य है।स्वामी कैलाशानंद गिरी के शिष्य स्वामी अवंतिका नंद ब्रह्मचारी एवं पूर्व विधायक संगीत सोम ने फूलमाला पहनाकर सभी संतांे का आभार व्यक्त किया।मंच का संचालन आचार्य पवनदत्त मिश्र ने किया।इस दौरान ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी,स्वामी ललितानंद गिरी,महंत गोविंददास,स्वामी लोकेश मुनि,स्वामी अनंतानंद,अमेरिका से आए महामंडलेश्वर स्वामी वेदव्यासानंद,स्वामी गर्व गिरी,महंत रामरतन गिरी,महंत राजगिरी,स्वामी चिद विलासानंद,यूपी के मंत्री अनिल सिंह,कपिलदेव अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य लोग व देश विदेश से आए हजारों श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।
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