इल्म ही ऐसी दौलत जो बांटने से बढ़ती है- मुफ्ती अमीन
दारुल उलूम फारूकिया में हुआ सालाना जलसा
मदरसे से फारिग होने वाले छात्रों को बांधी गई दस्तार
रिपोर्ट समीर चौधरी
देवबंद-दारुल उलूम फारूकिया में सालाना जलसे का आयोजन हुआ। दारुल उलूम देवबंद के शेख सानी मुफ्ती मोहम्मद अमीन पालनपुरी ने छात्रों को हदीस की किताब मिश्कात शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया। जलसे में मदरसे से फारिग होने वाले छात्रों के दस्तार (पगड़ी) बांधी गई।
ईदगाह रोड पर आयोजित हुए मदरसे के 17वें सालाना जलसे का आगाज छात्र मोहम्मद शोएब ने कुरआन करीम की तिलावत कर किया। छात्रों को मिश्कात शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाने के उपरांत मुफ्ती अमीन पालनपुरी ने कहा कि इस्लाम सलामती का मजहब है। मदरसा छात्रों की जिम्मेदारी है कि वह इस्लामी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारते हुए दुनिया के इस्लाम की सही तस्वीर पेश करें। कहा कि इल्म ही एक ऐसी दौलत है जो बांटने पर बढ़ती है। इसलिए उन्होंने जो कुछ यहां रहकर सीखा है वह दूसरों तक जरूर पहुंचाएं। मुफ्ती मोहम्मद आदिल, मौलाना अफजल बस्तवी, कारी जमशेद ने भी छात्रों को नसीहतें की। इस दौरान मदरसे से फारिग होने वाले छात्रों, मुफ्तियों और हाफिजों दस्तारबंदी की गई। अध्यक्षता मोहतमिम मौलाना नूरुल हुदा कासमी ने की। मौलाना रहमतुल्लाह नूर कासमी, मुफ्ती इफ्तिखार, मौलाना मेराज, मुफ्ती मोहम्मद तसलीम, मौलाना अब्दुल रहमान, मुफ्ती मोहम्मद अतहर, मौलाना असजद, मौलाना अब्दुल माजिद, कारी अहबाब, डा. साकिब, परवेज आदि मौजूद रहे।
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