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डिजिटलीकरण आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है- प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा

डिजिटलीकरण आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है- प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के मैकेनिकल अभियांत्रिकी विभाग के सभागार में “विकसित भारत के लिए डिजिटलीकरण की भूमिका” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल युग की आवश्यकताओं से अवगत कराने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।कार्यक्रम में एआईसीटीई के समन्वयक डॉ.बुद्ध चंद्रशेखर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी विकास के बीच संबंध को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।उन्होंने कहा कि भारत के विद्यार्थियों की मानसिक शक्ति हजारों वर्षों की सांस्कृतिक और वैचारिक परंपरा से विकसित हुई है,जो उन्हें वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाती है।डॉ.शेखर ने अपने वक्तव्य में उल्लेख किया कि भारतीय वेदों पर आज भी विश्व के विभिन्न देशों में शोध कार्य हो रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जर्मनी जैसे देशों में वेदों का अध्ययन कराया जा रहा है और संस्कृत भाषा का विशेष महत्व दिया जा रहा है।उन्होंने कहा कि यह भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटलीकरण आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है।उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से शिक्षा,स्वास्थ्य, प्रशासन और उद्योग के क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन संभव है।उन्होंने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे नई तकनीकों को अपनाकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दें।अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो.मयंक अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में तकनीकी शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक्स,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,मशीन लर्निंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना अत्यंत आवश्यक है,ताकि विद्यार्थी रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।इलेक्ट्रॉनिक्स एवं अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे व्याख्यान छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं,क्योंकि इससे उन्हें अपने करियर की दिशा निर्धारित करने में सहायता मिलती है।उन्होंने मुख्य वक्ता सहित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।कार्यक्रम में विभाग के अनेक शिक्षकगण उपस्थित रहे,जिनमें डॉ.एम.एम.तिवारी,डॉ.संजीव लाम्बा,गजेंद्र सिंह,प्रवीण पांडेय,डॉ.अमन त्यागी,मयंक पोखरियाल,नमित खंडूजा तथा सहायक कुलसचिव डॉ.पंकज शामिल थे।सभी शिक्षकों ने छात्रों को इस प्रकार के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।इस अवसर सहायक कुलसचिव डॉ.पंकज कौशिक,डॉ.एम.एम तिवारी,डॉ.संजीव लाम्बा,डॉ.निशांत,डॉ.धर्मेंद्र बालियान,दीपक वर्मा,उमाशंकर आदि शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे व्याख्यान कार्यक्रम का संचालन डॉ.प्रशांत कौशिक द्वारा किया गया।



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