भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान पर भूमि सुपोषण संगोष्ठी 2026 आयोजित
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार-गुरुकुल कांगड़ी (समविश्वविद्यालय) के वनस्पति एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग में भूमि सुपोषण संगोष्ठी 2026 कार्यक्रम का शुभारम्भ वेदमंत्रोपचार,दीप प्रज्जवलन तथा भूमि पूजन के साथ किया गया। भूमि सुपोषण एवं संरक्षण अभियान’,भारतीय कृषि परंपरा को जीवित रखने वाले किसानों,किसानों के साथ कार्यरत संस्थाओं,कृषि वैज्ञानिकों और विज्ञाननिष्ठ किसानों का भारतीय कृषि पद्धति का पुनरुद्धार करने के हेतु एक एक संयुक्त प्रयास है।इसका लक्ष्य है, आज के युग में कृषि क्षेत्र की मांगों में कोई समझौता किये बिना भूमि सुपोषण की पुनस्थापना! ”दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेस एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी और अक्षय कृषि परिवार के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।
संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर वनस्पति एवं सूक्ष्मजीवविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो.मुकेश कुमार ने इस आयोजन का श्रेय विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा को देते हुए कहा कि कुलपति का दूरदर्शी दृष्टिकोण,संस्थान के प्रति उनका गहरा लगाव और उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली ही इस कार्यक्रम की आधारशिला है।इस मौके पर कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा ने सभी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष 13अप्रैल 2021 को राष्ट्र स्तरीय भूमि सुपोषण एवं संरक्षण जन अभियान के अंतर्गत देशभर में भूमि पूजन कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है।यह पहल मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रयास है।अपने संबोधन में उन्होंने संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन तथा संरक्षण-आधारित उपायों के माध्यम से मृदा उर्वरता को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।संगोष्ठी के आकर्षण का केंद्र कन्या गुरुकुल परिसर,हरिद्वार की छात्राओं द्वारा बनाई गई भव्य रंगोली रही।डॉ.वरिंदर विर्क के निर्देशन में एम.एस-सी.(सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग) की छात्राओं ने अपनी कला के माध्यम से धरती माता और प्रकृति के सौंदर्य को जीवंत कर दिया,जिसकी सभी अतिथियों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।इसके साथ ही,कार्यक्रम के दौरान डॉ.कल्पना सागर द्वारा प्रदान किए गए निरंतर लाइव सपोर्ट और कुशल समन्वय की भी विशेष रूप से सराहना की गई।विशिष्ट अतिथि प्रो.रविचंद्रन वी.(कुलपति,डी.पी.एस.आर.यू.)उन्होंने रोगाणुरोधी प्रतिरोध और मृदा स्वास्थ्य के बीच के वैज्ञानिक संबंधों पर प्रकाश डालते हुए इसे भविष्य की बड़ी चुनौती बताया।प्रो.रविचंद्रन वी.ने भूमि सुपोषण से ए.एम.आर.नियंत्रण तक ग्रह के स्वास्थ्य के लिए एक वन हेल्थ दृष्टिकोण विषय पर एक व्याख्यान दिया।डॉ.सुरेंद्र सिंह(सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा)ने जलवायु -अनुकूल खेती के लिए बायोइनोकुलेंट्स की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।भूमि सुपोषण का अर्थ है मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान कर उसकी उपजाऊ शक्ति को पुनर्जीवित करना।रासायनिक खेती से बंजर होती धरती को बचाने,खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने,स्वास्थ्य के लिए विष-मुक्त भोजन उगाने और सतत कृषि के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण है।यह गोबर,वर्मीकम्पोस्ट और प्राकृतिक खेती पर जोर देता है।प्रो.पुरुषोत्तम कौशिक एवं डॉ.विपिन कुमार ने मिट्टी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य का आधार बताते हुए पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संगम पर बल दिया।प्रोफेसर पुरुषोत्तम कौशिक द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य की नींव के रूप में मृदा स्वास्थ्य विषय पर अपना व्याख्यान दिया। अक्षय कृषि परिवार के राष्ट्रीय सह-संयोजक आलोक कुमार गुप्ता ने इसे विकसित भारत 2047 के लिए एक आवश्यक जन- आंदोलन बताया।उन्होंने देश की 30ःअवनत भूमि को बचाने के लिए इसे एक जन अभियान बनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रोफेसर सत्यदेव निगमालंकार ने मानव स्वास्थ्य में मिट्टी के महत्व और वैदिक साहित्य में इसके वर्णन को समझाया है।उन्होंने मिट्टी की उर्वरता और स्थिरता बनाए रखने में पशुधन विशेष रूप से गायों के महत्व पर जोर दिया।विभागाध्यक्ष प्रो.मुकेश कुमार ने कार्यशाला की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।कार्यक्रम का समापन प्रो.सत्येंद्र राजपूत ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर जीवविज्ञान संकाय की डीन प्रो.नमिता जोशी,डॉ.कार्तिकेय गुप्ता,डॉ.हरीश कुमार,डॉ.संदीप कुमार,डा.विनीत बिश्नोई,डा.चिरंजीब बैनर्जी, जनसंपर्क अधिकारी डॉ.शिव कुमार चौहान,कुलभूषण शर्मा तथा विभाग के छात्र-छात्राएं तथा शोधार्थी उपस्थित रहे।
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