परमार्थ निकेतन में श्री हनुमान जयंती का दिव्य, भव्य एवं आध्यात्मिक आयोजन
चौरासी लाख योनियों के चक्र से मुक्ति का सरल मार्ग है हनुमान चालीसा-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
ऋषिकेश- परमार्थ निकेतन में श्रीहनुमान जयंती का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा,भक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वतीएवं साध्वी भगवती सरस्वती के पावन सान्निध्य में अनेक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया,जिसमें देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक ऊर्जा को आत्मसात किया।
प्रातःकालीन बेला में परमार्थ निकेतन के पावन हनुमान घाट पर विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। श्रीरामचरितमानस के सुन्दरकांड का पाठ वातावरण को राममय और भक्तिमय बना गया। भजनों और मंत्रोच्चारण से सम्पूर्ण परिसर में आध्यात्मिक तरंगें प्रसारित होती रहीं,जिससे उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।इस अवसर पर नारी रत्न श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी ने ‘कुबेर का खजाना’विषय पर अपने विचार साझा किये।उन्होंने जीवन में सकारात्मक सोच, समृद्धि और आंतरिक संतुलन के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि सच्चा खजाना बाहरी नहीं, बल्कि हमारे भीतर की संतुष्टि,कृतज्ञता और सेवा भावना में निहित है।स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि यदि हम हनुमान जी के जीवन को ध्यानपूर्वक देखें,तो हमें तीन मुख्य सूत्रों का दर्शन होता है,सेवा,समर्पण और स्मरण।हनुमान जी की प्रभु भक्ति,उनके प्रति प्रेम,समर्पण और निरंतर स्मरण अद्भुत है।उनका सम्पूर्ण जीवन यज्ञमय है।उन्होंने अपने जीवन में कभी भी अहंकार को पनपने नहीं दिया।उसी प्रकार हमें भी जब-जब जीवन में अहंकार आए,उसे प्रभु के चरणों में समर्पित कर अपने जीवन को औषधि बना लेना चाहिए, यही जीवन का सार है।स्वामीजी ने यह भी कहा कि यदि हनुमान जी को प्रसन्न करना है, तो उसकी शुरुआत श्रीराम जी की भक्ति से करनी चाहिए।स्वामी जी ने हनुमान चालीसा के गहन आध्यात्मिक सूत्रों का भी विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि हनुमान चालीसा केवल एक स्तुति नहीं,बल्कि जीवन को दिशा देने वाला एक दिव्य मार्गदर्शन है।उन्होंने कहा कि“चौरासी लाख योनियों के चक्र से मुक्ति पाने का सरल और सशक्त साधन हनुमान चालीसा है।”साध्वी भगवती सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में हनुमान जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान करते हुए कहा कि आज के समय में हमें उनके गुणों निःस्वार्थ सेवा,अटूट विश्वास और पूर्ण समर्पण को अपने जीवन में उतारने की आवश्यकता है। परमार्थ सेवा समिति मुम्बई से लक्ष्मीनारायण जी बियानी,श्याम सुन्दर आशाराम काबरा ,गिरधर गोपाल असोपा,सनील असोपा,रमन शाह,मनोज राठी,मनमोहन गोयनका,रवि लाला पुरिया,निशा जैन,शशि राठी,गोविन्द रेणू सराफ,श्रीमती प्रमिला गोयनका,हरिनंदन गुप्ता,सूरजभान अग्रवाल एवं गोपाल अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
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