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लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए मामलों सहित 125 मामलों सुनवाई

 लैंड फ्रॉड से संबंधित 20 लंबित एवं 105 नए मामलों सहित 125 मामलों सुनवाई 

भूमि फर्जीवाडे़ पर बडी कार्रवाई,आयुक्त ने 24मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के दिए निर्देश

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

देहरादून-गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की उच्चस्तरीय बैठक हुई।बैठक में पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या की समीक्षा की गई।इस दौरान समिति द्वारा लैंड फ्रॉड से संबंधित 20लंबित एवं 105नए मामलों सहित 125 मामलों सुनवाई की गई। इस दौरान समिति द्वारा कुल 45 प्रकरणों का निस्तारण के साथ ही 24 मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।लैंड फ्रॉड समिति में दर्ज नए मामलों में सबसे अधिक 74 मामले देहरादून जनपद के है,जबकि हरिद्वार के 15,पौडी के 13,टिहरी के 02 तथा चमोली का 01प्रकरण भी इसमें शामिल है।

गढ़वाल आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।गढ़वाल आयुक्त ने कहा कि लैंड फ्रॉड कमेटी की बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने बताया कि हर 15दिनों के अंतराल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा की जा रही है।बैठक में कुल 125प्रकरणों पर विचार किया गया, जिनमें 20लंबित और 105नए मामले शामिल थे।इनमें से 24प्रकरण अत्यंत गंभीर पाए गए,जिनमें तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।इन 24मामलों में उदय सिंह,सुचेता सेमवाल,राजीव जायल वाल,गुलाब सिंह,किरन बागड़ी,अजय कुमार,संजीव गर्ग,मिथलेश सिंघल,जगदंबा रावत,अर्जुन सिंह,सामरजी देवी समेत कुल 13शिकायतें विशेष रूप से भूमि पर तारबाड़ कर कब्जा व जमीन को खुर्द-बुर्द करने से संबंधित हैं।आयुक्त ने कहा कि जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं-कहीं बिना जमीन के ही बिक्री,कहीं खसरा नंबर में हेरफेर कर अलग भूमि देना,तो कहीं 2बीघा भूमि को 4बीघा बताकर बेचना जैसे गंभीर फर्जीवाड़े उजागर हुए हैं। आयुक्त ने ऐसे मामलों में पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।इसके अतिरिक्त भूमि धोखाधडी,अवैध कब्जा एवं गंभीरता वाले अन्य 11मामलो पर भी आयुक्त ने एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी किए है।आयुक्त ने कहा कि 24 एफआईआर योग्य मामलों के अतिरिक्त 45 अन्य प्रकरणों का भी निस्तारण किया गया है।इनमें कुछ मामलों में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो गया है।कुछ में लेन-देन की समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप से सुलझ गई और धनराशि वापस कर दी गई।कुछ प्रकरण सिविल न्यायालय में लंबित पाए गए,जिनमें बेनामा निरस्तीकरण से संबंधित विवाद हैं और इनमें लैंड फ्रॉड नहीं पाया गया।आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों का निस्तारण विधिवत न्यायालय के माध्यम से ही होगा।आयुक्त ने विशेष रूप से बड़े भू-क्षेत्र से जुड़े मामलों में कार्रवाई में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की।उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे लंबित प्रकरणों में 15दिनों के भीतर ठोस प्रगति लाना सुनिश्चित करें।ऐसे मामलें जिनमें अवैध निर्माण सिद्ध हो चुका है,उनमें तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए।स्पष्ट भूमि धोखाधड़ी के सभी मामलों में अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए है।जो मामले भूमि धोखाधडी से संबंधित नही है उनकी सूचना शिकायतकर्ता को भी दी जाए।आयुक्त ने न्यायालय में लंबित मामलों को छोड़कर अन्य सभी प्रकरणों में विभागीय स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा किसी भी भूमि संबंधी मामले को अनावश्यक रूप से लंबित न रखने के निर्देश दिए।लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में पुलिस महानिरीक्षक गढ़वाल राजीव स्वरूप,अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान,अपर जिलाधिकारी (वि.रा) केके मिश्रा,अपर जिलाधिकारी टिहरी शैलेन्द्र सिंह नेगी, एसपी (ग्रामीण) जया बलूनी,डीजीसी नितिन वशिष्ट,एसडीएम डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल ,एसडीएम कुमकुम जोशी,एसडीएम यमकेश्वर छत्तर सिंह चौहान,एसडीएम गैरसैंण अहमद अबरार,उप निबंधक स्टाम्प रामदत्त मिश्र सहित वर्चुअल माध्यम से सभी संबंधित तहसीलों के वरिष्ठ अधिकारी व तहसीलदार उपस्थित थे।

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