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जनपदवासी जनगणना कार्य में सहयोग करें और सही जानकारी प्रदान करें-पी.आर.चौहान

 जनपदवासी जनगणना कार्य में सहयोग करें और सही जानकारी प्रदान करें-पी.आर.चौहान

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- जिला जनगणना अधिकारी पी.आर.चौहान ने अवगत कराया है कि उत्तराखण्ड शासन, सामान्य प्रशासन विभाग (जनगणना) की अधिसूचना 04मई 2026 के क्रम में जनपद हरिद्वार की जनता से अपील की जाती है कि भारत की जनगणना 2027 के संबंध में मकानों की गणना का कार्य/जनसंख्या गणना कार्य के दौरान उनसे पूछे गये प्रश्नों के बारे में सटीक और स्पष्ट जानकारी देने में सहयोग प्रदान करें।(1)जनगणना आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है जो मकान की स्थिति,सुविधाओं और सम्पत्तियों,जनसांख्यिकी,साक्षरता,धर्म,आर्थिक गतिविधि, प्रवासन, प्रजनन क्षमता आदि निम्नतम प्रशासनिक इकाइयों तक अर्थात ग्रामीण क्षेत्रों में गांवों और शहरी क्षेत्रों में नगरों/वार्डों तक उपलब्ध होता है।

इसका व्यापक उपयोग केंद्र/राज्य /संघ राज्य क्षेत्रों की सरकारों द्वारा योजना निर्माण,नीति निर्धारण और प्रभावी सार्वजनिक प्रशासन के लिए किया जाता है।इसके अतिरिक्त,जनगणना डेटा का उपयोग संसदीय ,विधानसभा,पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों के निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और आरक्षण के लिए भी किया जाता है। अतःजनता से अपेक्षा की जाती है कि वे जनगणना कार्य में सहयोग करें और सही जानकारी प्रदान करें।जनगणना अधिकारी उस स्थानीय क्षेत्र की सीमा में,जिसके लिए नियुक्ति की गई है सभी व्यक्तियों से ऐसे सभी प्रश्न पूछ सकेगा है जिन्हें पूछने के लिए, उसे केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त जारी और राजपत्र में प्रकाशित किए गए अनुदेशों द्वारा,निदिष्ट किया जाए।ऐसा प्रत्येक व्यक्ति,जिससे उपधारा (1) के अधीन कोई प्रश्न पूछा जाता है,अपनी सर्वाेत्तम जानकारी या विश्वास के अनुसार उस प्रश्न का उत्तर देने के लिए वैध रूप से आबद्ध होगाःपरंतु कोई भी व्यक्ति अपने परिवार के किसी स्त्री सदस्य का नाम बताने के लिए आबद्ध नहीं होगा और कोई भी स्त्री अपने पति या मृत पति का अथवा ऐसे किसी अन्य व्यक्ति का नाम बताने के लिए आबद्ध नहीं होगी जिसका नाम बताने के लिए वह रुढ़ि द्वारा निषिद्ध की गई हो।किसी भी व्यक्ति को,जनगणना अधिकारी द्वारा उस हैसियत में अपने कर्तव्य के निर्वहन में तैयार की गई किसी पुस्तक,रजिस्टर या अभिलेख का,अथवा धारा 10 के अधीन परिदत किसी अनुसूची का,निरीक्षण करने का अधिकार नहीं होगा,और भारतीय साक्ष्य अधिनियम,2023 (2023 का 47) में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी किसी ऐसी पुस्तक,रजिस्टर,अभिलेख या अनुसूची में की कोई भी प्रविष्टि किसी ऐसे कार्य या लोप के लिए,जो इस अधिनियम के अधीन अपराध बनता है।

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