सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना तथा वातावरणीय संतुलन मानव जाति का सर्वश्रेष्ठ कर्म
रिपोर्ट श्रवण कुमार झा
हरिद्वार- सर्वे भवन्तु सुखिनः की कामना तथा वातावरणीय संतुलन मानव जाति का सर्वश्रेष्ठ कर्म है,जिसके लिए सदैव तत्पर एवं जागरूक रहना जरूरी है।गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय द्वारा इस संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से सप्ताह के प्रत्येक शनिवार को शहर के प्रमुख स्थलों पर आर्य समाज के सिद्धान्तों को प्रचारित-प्रसारित एवं वैदिक परम्परा के बढ़ावे के लिए यज्ञ का आयोजन किया जाएगा।इस आयोजन की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए संयोजन का दायित्व वेद विभाग के डा.दीनदयाल तथा सह संयोजक डा.अजय मलिक को सौंपा गया है।
इस क्रम में साप्ताहिक यज्ञ का प्रथम आयोजन समविश्वविद्यालय के दयानन्द द्वार के समीप सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर समविश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि संस्कार तथा संस्कृति संरक्षण के लिए वैदिक सिद्धान्तों का प्रचार- प्रसार किया जाना जरूरी है।बाह्य तथा आन्तरिक वातावरण शुद्ध होने से विचारों में शुद्धता तथा सदकर्म की प्रेरणा जागृत होती है जिसमें यज्ञ का विशेष महत्व है। कुलसचिव प्रो.सत्यदेव निगमालंकार ने कहा कि समाज में घटते वैदिक मूल्यों के पुनर्राद्धार के लिए आर्य समाज के सिद्धान्त जीवन में रचनात्मक परिवर्तन करने में सहायक है।इसलिए सभी को नित्य प्रति यज्ञ का संकल्प लेना चाहिए।इससे चरित्रवान संतान तथा समाज में एकता की भावना फलीभूत होती है।यज्ञ का आयोजन डा.दीनदयाल के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर प्रो.नवनीत,प्रो.विपुल शर्मा,प्रो.मयंक अग्रवाल,डा.अजय मलिक,डा.बबलू आर्य,डा.हरेन्द्र कुमार,डा.राजीव शर्मा,डा.संदीप,डा.धर्मेन्द्र बालियान,डा.चिरंजीव बनर्जी,डा.भारत वेदालंकार ,डा.मदन लाल जाट,कुलदीप,वीरेन्द्र पटवाल,किशन कुमार,ईसम सिंह सैनी,चमेल सिंह,डा.सत्यपति, राजकुमार ,राजवीर,प्रकाश तिवारी,नन्दकिशोर,डा.संजील सहित शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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