डॉ. बशीर बद्र की याद में भव्य श्रद्धांजलि सभा एवं शायरी का आयोजन
रिपोर्ट समीर चौधरी
सहारनपुर-आधुनिक उर्दू ग़ज़ल के शिखर पुरुष, विश्वविख्यात शायर और अदबी दुनिया की महान हस्ती डॉ. बशीर बद्र की स्मृति में बज़्म-ए-अज़ीज़ान-ए-सुख़न, सहारनपुर के तत्वावधान में अज़ीज़ हाउस, वर्धमान कॉलोनी, चिलकाना रोड, सहारनपुर में एक गरिमयी एवं उच्चस्तरीय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नगर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में शायरों, साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों तथा अदब-प्रेमियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध धार्मिक एवं साहित्यिक व्यक्तित्व मुफ़्ती सादिक मज़ाहिरी ने की, जबकि वरिष्ठ व्यंग्य एवं ग़ज़लकार डॉ. आसिम पीरज़ादा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार, शायर एवं साहित्यकार डॉ. रईस कमाल ने प्रभावशाली ढंग से किया।सभा के प्रथम सत्र में वक्ताओं ने डॉ. बशीर बद्र के व्यक्तित्व, कृतित्व तथा उर्दू साहित्य में उनके अनुपम योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में मुफ़्ती सादिक मज़ाहिरी ने कहा कि डॉ. बशीर बद्र ने अपनी विशिष्ट शैली, सरल किंतु प्रभावशाली भाषा और मानवीय संवेदनाओं से भरपूर शायरी के माध्यम से उर्दू ग़ज़ल को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा-स्रोत बनी रहेंगी। मुख्य अतिथि डॉ. आसिम पीरज़ादा ने डॉ. बशीर बद्र की ग़ज़लों की कलात्मक विशेषताओं पर चर्चा करते हुए उनसे जुड़ी अनेक साहित्यिक स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र की शायरी प्रेम, इंसानियत, रिश्तों की नज़ाकत और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों की सच्ची अभिव्यक्ति है, जो सदैव जीवित रहेगी। कार्यक्रम के संचालक डॉ. रईस कमाल ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि डॉ. बशीर बद्र उर्दू भाषा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित और लोकप्रिय शायर थे। उनके निधन से सम्पूर्ण उर्दू जगत शोकाकुल है। उन्होंने 91 वर्ष की आयु में भोपाल में अंतिम सांस ली। आधुनिक उर्दू ग़ज़ल को नई पहचान देने वाले बशीर बद्र को “जदीद उर्दू ग़ज़ल का इमाम” भी कहा जाता है। उनकी साहित्यिक सेवाएँ सदैव स्मरणीय रहेंगी। इस अवसर पर सिकंदर हयात कैलाशपुरी, असलम मोहसिन, ताहिर अमीन, सैयद अनवर साबरी, फ़राज़ अहमद फ़राज़, अफ़ज़ाल अमीर, डॉ. आबिद वफ़ा तथा महमूद असर सहित अनेक शायरों एवं साहित्यकारों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए डॉ. बशीर बद्र की साहित्यिक सेवाओं को श्रद्धापूर्वक नमन किया तथा उनके निधन को उर्दू साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया। सभा के द्वितीय सत्र में एक काव्य गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें उपस्थित शायरों ने अपनी चयनित रचनाएँ प्रस्तुत कीं। श्रोताओं ने कवियों की उत्कृष्ट प्रस्तुतियों को भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के समापन पर मुफ़्ती सादिक मज़ाहिरी ने मरहूम डॉ. बशीर बद्र की मग़फ़िरत एवं उच्च दर्जात के लिए विशेष दुआ कराई। तत्पश्चात मेज़बान डॉ. रईस कमाल एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती बिलक़िस बेगम की ओर से उपस्थित अतिथियों का सम्मान किया गया।

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