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संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मनाया गया जगदीश स्वरूप आश्रम का वार्षिक समारोह

 संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में मनाया गया जगदीश स्वरूप आश्रम का वार्षिक समारोह

गुरूजनों की ज्ञान और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाना ही जीवन का उद्देश्य-स्वामी अमृतानंद

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- भूपतवाला स्थित जगदीश स्वरूप आश्रम का वार्षिक समारोह सभी तेरह अखाड़ों के संत महापुरूषों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति में मनाया गया।आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानंद महाराज के संयोजन में आयोजित वार्षिक समारोह के दौरान संतों और श्रद्धालुओं ने ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्म सागर भूरी वाले,बह्मलीन स्वामी जगदीशवरानंद,ब्रह्मलीन स्वामी विध्यानंद एवं ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी परमात्मदेव महाराज ने कहा कि ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मसागर भूरी वाले,बह्मलीन स्वामी जगदीशवरानंद,ब्रह्मलीन स्वामी विध्यानंद एवं ब्रह्मलीन स्वामी स्वरूपानंद त्याग,तपस्या और सेवा की प्रतिमूर्ति थे।ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्म सागर भूरी वाले सनातन धर्म एवं शास्त्र परंपरा के अग्रणी विद्वान थे।उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानंद महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन गुरूजनों की ज्ञान और सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मानव कल्याण में योगदान करना ही उनके जीवन का उद्देश्य है।महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी ने ब्रह्मलीन संतों को नमन करते हुए कहा कि महामंडलेश्वर स्वामी अमृतानंद जिस प्रकार अपने गुरूजनों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं,वह सभी के लिए प्रेरणादायी है।स्वामी ऋषिश्वरानंद एवं स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति के संरक्षण संवर्द्धन में ब्रह्मलीन संतों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।स्वामी अनंतानंद रामजी महाराज ने सभी संतों और अतिथियों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और आभार व्यक्त किया।इस दौरान स्वामी गोविंददास,स्वामी रामदास शास्त्री,स्वामी ऋषिश्वरानंद,स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी,स्वामी आशुतोष महाराज,स्वामी राममुनि,स्वामी हरिहरानंद,स्वामी दिनेश दास,राजमाता आशा भारती,स्वामी शिवम महाराज,स्वामी ज्ञानानंद,महंत मोहन सिंह,महंत सूरजदास,संत जगजीत सिंह,स्वामी कृष्णानंद ,महंत विष्णुदास,स्वामी रविदेव शास्त्री,स्वामी कमलेशानंद सिंह बड़ी संख्या में संत महंत और श्रद्धालुजन मौजूद रहे।

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