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बच्चों और किशोरों के लिए मोबाइल के उपयोग को लेकर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. रविकांत निरंकारी ने माता पिताओ को दी सलाह

बच्चों और किशोरों के लिए मोबाइल के उपयोग को लेकर इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. रविकांत निरंकारी ने माता पिताओ को दी सलाह

रिपोर्ट अमान उल्ला खान

सहारनपुर– इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, सहारनपुर शाखा ने बच्चों और किशोरों के लिए मोबाइल के उपयोग को लेकर विस्तृत सिफारिशें जारी की हैं। ये दिशा-निर्देश आईएपी के राष्ट्रीय दिशा-निर्देश 2020-2021 पर आधारित हैं। बढ़ते स्क्रीन समय के कारण बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए ये गाइडलाइन्स जारी की गई हैं।

डॉ. रविकांत निरंकारी ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि 2 साल से कम मे जीरो स्क्रीन टाइम परिवार से वीडियो कॉल की अनुमति है। 2 से 5 साल: अधिकतम दिन में 1 घंटा केवल उच्च गुणवत्ता वाले, शैक्षणिक कंटेंट माता-पिता अपने ही बच्चो को दिखाए6 से 10 साल के बच्चे अधिकतम _1-2 घंटे/दिन_। इसमें मनोरंजन + पढ़ाई दोनों का स्क्रीन टाइम शामिल है। डॉ. रविकांत निरंकारी ने कहा कि खाने के समय कोई स्क्रीन जैसे  मोबाइल,कंप्यूटर, लैपटॉप ,इस्तेमाल नहीं करना चाहिए सोने से 1 घंटे पहले मोबाइलसे दूरी बनाएं बच्चों के कमरे में टीवी नहीं होना चाहिए।बच्चों को हिंसक और तेज़ गति वाले कार्टून न दिखाएं।रोज 60 मिनट खेलना अनिवार्य करें। माता-पिता भी फोन का उपयोग सीमित करें।बच्चों में नींद कम हो गई है,पढ़ाई में ध्यान न लग रहा हो,चिड़चिड़ापन, गुस्सा बढ़ गया हो,आंखों में तनाव, सिरदर्द ,गर्दन ने दर्द या कमर दर्द की समस्या है तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें  अध्यक्ष डॉ. रविकांत निरंकारी ने कहा कि अधिक स्क्रीन टाइम से नींद की समस्या, शारीरिक गतिविधि में कमी, व्यवहार संबंधी दिक्कतें और पढ़ाई में गिरावट हो सकती है। माता-पिता को खुद उदाहरण बनकर "स्क्रीन-फ्री" पारिवारिक समय देना चाहिए।सचिव डॉ. हिमांशु कुमार ने कहा कि 2-5 साल के बच्चों के लिए माता-पिता के साथ बैठकर कंटेंट चुनना उनके मस्तिष्क विकास के लिए बहुत जरूरी है। वहीं डॉ. डी.के. तिवारी* ने रोजाना 60 मिनट आउटडोर खेल पर जोर दिया। आईएपी सहारनपुर शाखा जल्द ही स्कूलों और क्लीनिकों में अभिभावकों को जागरूक करने के लिए सत्र आयोजित करेगी।

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अंतिम लक्ष्य हर पीड़ित महिला को आत्मनिर्भर बनाकर समाज में ससम्मान स्थापित करना