"आत्मबोध ही परमात्मा के बोध का आधार" - ऋषिकेश में संत समागम सम्पन्न
ऋषिकेश में अंग्रेज़ी माध्यम युवा ज़ोनल संत समागम, युवाओं को दिया एकत्व का संदेश
सत्गुरु माता सुदीक्षा का संदेश: भौतिक सफलता क्षणिक, ईश्वर से एकत्व ही जीवन की संपदा
रिपोर्ट- राजपाल सिंह/धर्मेन्द्र अनमोल
ऋषिकेश-संत निरंकारी मिशन ब्रांच ऋषिकेश में सत्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं राजपिता रमित जी का पावन संदेश लेकर शाहाबाद से पधारे संत पी.पी. सिंह के सान्निध्य में *अंग्रेज़ी माध्यम युवा ज़ोनल स्तरीय संत समागम* श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।
जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह के दिशा निर्देशन में आयोजित समागम में ऋषिकेश, ज्वालापुर, विकासनगर, चंबा, नरेंद्रनगर, कोटद्वार, भोगपुर, हरिद्वार, देहरादून, हल्दुखाता, नई टिहरी, रायवाला, मसूरी, रुड़की, प्रेमनगर क्षेत्रों से आए युवाओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग कर आध्यात्मिक ज्ञान एवं मानव एकता का संदेश ग्रहण किया।इस अवसर पर *संत पी.पी. सिंह* ने कहा कि ऋषिकेश सदियों से आध्यात्मिक साधना, आत्मचिंतन और ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा का केंद्र रहा है। किसी भी पवित्र स्थान का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब मनुष्य सत्गुरु की कृपा से निराकार परमात्मा की पहचान कर अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा का बोध प्राप्त करे।उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रायः स्वयं को शरीर, मन, समाज अथवा राष्ट्र की पहचान तक सीमित कर लेता है, जबकि उसकी वास्तविक पहचान आत्मा है। शरीर और मन परिवर्तनशील हैं, किन्तु आत्मा शाश्वत है और उसी परमात्मा का अंश है। जब मनुष्य सत्गुरु की कृपा से निराकार का अनुभव करता है, तभी उसे वास्तविक शांति, आनंद और जीवन की पूर्णता प्राप्त होती है।संत जी ने कहा कि ब्रह्मज्ञान केवल बौद्धिक जानकारी नहीं, बल्कि आत्मा का प्रत्यक्ष अनुभव है। आत्मबोध ही परमात्मा के बोध का आधार है। यही अनुभूति मनुष्य को अहंकार, भय, अज्ञान तथा सांसारिक बंधनों से ऊपर उठाकर प्रेम, विनम्रता और निःस्वार्थ सेवा के मार्ग पर अग्रसर करती है।युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भौतिक उपलब्धियाँ और सांसारिक सफलता क्षणिक हैं, जबकि परमात्मा से एकत्व का अनुभव जीवन की सबसे बड़ी संपदा है। सिमरन, सत्गुरु के मार्गदर्शन तथा सत्य को जीवन में अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति इस दिव्य अनुभूति को प्राप्त कर सकता है।समागम का समापन विश्व शांति, मानव एकता तथा समस्त मानव जाति के कल्याण की मंगलकामना के साथ हुआ। समस्त पार्किंग, प्याऊ, लंगर एवं सफाई व्यवस्था सेवादल के वॉलिंटियर्स द्वारा की गई। संचालन सुदीक्षा चौहान एवं विकास आर्य* ने संयुक्त रूप से किया।


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