33वें ‘श्री रामायण को जाने’ प्रश्न मंच में बच्चों ने दिखाया रामायण का अद्भुत ज्ञान
सारंग संस्था ने समाजसेवियों, रामलीला कलाकारों और विशिष्ट अतिथियों को ‘श्री राम रत्न सम्मान’ से किया सम्मानित
रामायण जीवन को सही दिशा देने वाला संस्कार ग्रंथ-रमेश चंद्र छबीला
रिपोर्ट रवि बख्शी
सहारनपुर- न्यू शारदा नगर स्थित बीएसएम इंग्लिश मीडियम स्कूल में शारदीय नवरात्रों के पावन अवसर पर सारंग सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन द्वारा 33वें लोकप्रिय एवं ज्ञानवर्धक ‘श्री रामायण को जाने’ प्रश्न मंच का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों ने रामायण से जुड़े प्रश्नों के उत्तर अत्यंत सहजता, तत्परता और उत्साह के साथ देकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन संस्था के महासचिव रवि बख्शी ने किया।
प्रश्न मंच के दौरान बच्चों रौनक, नक्श ,परिधि, कशिश, नरेंद्र ,दीपिका,सच्ची ,अक्षय चौहान ,परी ,मानवी ,कुंज शर्मा ,शिवम ,मयंक सिंह, रिद्धिमा नेगी से रामायण से संबंधित अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक प्रश्न पूछे गए। इनमें राम-रावण युद्ध की अवधि, माता सीता की पालनहार माता सुनयना, हनुमान जी के पुत्र मकरध्वज, हनुमान जी को उनकी शक्तियों का स्मरण कराने वाले जामवंत जी, भगवान श्रीराम के धनुष का नाम कोदंड, भगवान श्रीराम की बहन शांता, ताड़का के पति सुंद राक्षस तथा रामायण में श्लोकों की संख्या 24 हजार जैसे प्रश्न शामिल रहे। बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ उत्तर देकर उपस्थित अतिथियों को प्रभावित किया।रामलीला कलाकारों ने संवादों से बांधा समां कार्यक्रम में सहारनपुर की विभिन्न रामलीला समितियों से जुड़े कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। श्री राधा कृष्ण मंदिर क्लब रामलीला, गांधी पार्क के युवा कलाकार प्रथम वत्स ने भगवान परशुराम एवं महापराक्रमी मेघनाद के प्रभावशाली संवाद प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं श्री आशुतोष रामलीला समिति, गुरुद्वारा रोड के बजरंगबली की भूमिका निभाने वाले तरुण अरोड़ा ‘रामदूत’ ने अपने दमदार संवादों से खूब तालियां बटोरीं। जुबली पार्क रामलीला के लीला प्रभारी अमित भसीन ने भी रामलीला के संवाद प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।इस अवसर पर समाजसेवी प्रवीण कपूर ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।संस्था के अध्यक्ष एवं साहित्यकार रमेश चंद्र छबीला ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बच्चों को रामायण की चौपाइयां याद कराना नहीं, बल्कि उन्हें रामायण में निहित जीवन मूल्यों और आदर्शों से परिचित कराना है। उन्होंने कहा, “भगवान श्रीराम हमें मर्यादा सिखाते हैं, भरत त्याग की प्रेरणा देते हैं और लक्ष्मण सेवा एवं समर्पण का संदेश देते हैं। रामायण हमारे लिए केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला संस्कार ग्रंथ है।” कार्यक्रम में समाज एवं विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को संस्था की ओर से ‘श्री राम रत्न सम्मान’ प्रदान कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में डिप्टी चीफ वार्डन डॉ. हंसराज सैनी, समाजसेवी संजीव टंडन, प्रवीण कपूर, अमित भसीन, प्रथम वत्स, सौरभ सिंघल, तरुण अरोड़ा ‘रामदूत’ तथा साधना सिंघल शामिल रहे।वहीं प्रश्न मंच में भाग लेने वाले प्रतिभागी बच्चों को उनकी प्रतिभा, ज्ञान एवं उत्साह के लिए ‘सरस्वती सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे और उपस्थित लोगों ने उनका उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम को सफल बनाने में हर्ष सिंघल, विजयलक्ष्मी, प्रतिमा, रूबी, ममता क्वात्रा, रवजीत कौर, मंजू शर्मा, प्रीति शर्मा, शीतल, टीना, दिव्या, मुस्कान, अर्चना, कमल सैनी, स्वाति शर्मा एवं प्रिया पवार सहित अन्य सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि रामायण का ज्ञान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को मर्यादा, त्याग, सेवा, समर्पण और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है।

0 टिप्पणियाँ