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चाणक्य शाखा, हरिद्वार क्षेत्र का भव्य पथ संचलन संपन्न

 चाणक्य शाखा, हरिद्वार क्षेत्र का भव्य पथ संचलन संपन्न

शस्त्र पूजन एवं विजयादशमी उत्सव के माध्यम से स्वयंसेवकों ने दिया राष्ट्रभक्ति,अनुशासन और सामाजिक समरसता का संदेश

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना दिवस एवं विजयादशमी के पावन अवसर पर चाणक्य शाखा क्षेत्र के स्वयंसेवकों द्वारा शस्त्र पूजन एवं भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया।इस अवसर पर आर्यनगर कॉलोनी,नंदपुरी कॉलोनी एवं मयूर विहार कॉलोनी क्षेत्र में पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने अनुशासित एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में पथ संचलन निकाला।पथ संचलन में सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवकों ने सहभागिता कर राष्ट्र के प्रति समर्पण, संगठनात्मक अनुशासन और सामाजिक एकता का परिचय दिया।

पथ संचलन के दौरान क्षेत्र में उत्सव एवं देशभक्ति का वातावरण देखने को मिला।स्थानीय निवासियों ने स्वयंसेवकों का देशभक्ति गीतों और पुष्पवर्षा के साथ स्वागत एवं अभिनंदन किया।मार्ग में विभिन्न स्थानों पर नागरिकों द्वारा किए गए स्वागत से स्वयंसेवकों का उत्साह और अधिक बढ़ा।पूर्ण गणवेश में कदमताल करते हुए स्वयंसेवकों का अनुशासित स्वरूप आकर्षण का केंद्र रहा।कार्यक्रम के माध्यम से समाज में राष्ट्रप्रेम,कर्तव्यनिष्ठा,सेवा,समर्पण एवं सांस्कृतिक चेतना का संदेश प्रसारित हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ शस्त्र पूजन के साथ हुआ।विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में शक्ति,शौर्य,धर्म,सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना भी विजयादशमी के दिन हुई थी।इस दृष्टि से यह अवसर स्वयंसेवकों के लिए विशेष महत्व रखता है।कार्यक्रम में संघ की परंपराओं,राष्ट्र के प्रति दायित्वबोध तथा समाज जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के संकल्प को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एवं पूर्व जिला संघचालक रोहिताश्व कुँवर चौहान ने विजयादशमी पर्व की ऐतिहासिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के जीवन,आदर्शों,मर्यादा,त्याग,कर्तव्य परायणता और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का उल्लेख करते हुए स्वयंसेवकों को उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की प्रेरणा दी।उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं,बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय प्राप्त करने,समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने तथा राष्ट्रहित को सर्वाेपरि रखने का संकल्प लेने का पर्व है।प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य,न्याय,मर्यादा और कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।उनके आदर्श आज भी भारतीय समाज और राष्ट्रजीवन के लिए प्रेरणास्रोत हैं। श्री चौहान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि,संघ की विचारधारा, संगठनात्मक कार्यपद्धति तथा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में संघ और उसके आनुषांगिक संगठनों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति अथवा संस्था का कार्य नहीं,बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। समाज में सेवा,संस्कार,अनुशासन,ससमाज के जरूरतमंद वर्गों की सहायता करने,सामाजिक एकता को मजबूत बनाने तथा अपने आचरण से राष्ट्रभक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्ठा और समर्पण के साथ करता है,तभी एक सशक्त,संगठित एवं जागरूक समाज का निर्माण होता है। कार्यक्रम में नगर संघचालक एवं अधिवक्ता ज्ञानेश्वर ठकराल ने उपस्थित स्वयंसेवकों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने सभी को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने,समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने तथा राष्ट्रसेवा के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने की प्रेरणा दी।उन्होंने अपने संदेश में संगठनात्मक एकता,सामाजिक सद्भाव,अनुशासन और सेवा भावना के महत्व को रेखांकित किया।उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक का जीवन समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रतीक होना चाहिए। प्रत्येक स्वयंसेवक अपने व्यवहार,कार्य और विचारों से समाज में सकारात्मकता का प्रसार करे तथा भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन में अपनी भूमिका निभाए। कार्यक्रम में मुख्य शिक्षक की भूमिका अमरेश कुमार ने निभाई। मंच का परिचय शाखा कार्यवाह राजेन्द्र रूहेला ने प्रस्तुत किया।डॉ.अश्वनी द्वारा एकल गीत प्रस्तुत किया गया,जबकि प्रिय पराक्ष ने अमृत वचन का वाचन किया।कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा अनुशासन,गरिमा एवं उत्साह से परिपूर्ण रही।उपस्थित स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पथ संचलन के दौरान स्वयंसेवकों की एकरूपता,अनुशासित कदमताल और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना ने क्षेत्रवासियों का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा एवं देशभक्ति गीतों के माध्यम से किया गया स्वागत कार्यक्रम के प्रति समाज के उत्साह और सहभागिता को दर्शाता रहा।कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व को स्मरण करने के साथ-साथ स्वयंसेवकों में संगठनात्मक अनुशासन, राष्ट्रभक्ति,सेवा,सामाजिक समरसता और कर्तव्यबोध की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।इस अवसर पर बस्ती प्रमुख ब्रह्मपाल,सह बस्ती प्रमुख वेदपाल,व्यवस्था प्रमुख देवी प्रसाद, पार्षद पति सतेन्द्र चौधरी,धनवीर,डॉ.सुधीर रूहेला,सतीश गोला,सतीश चौहान,सतीश गुप्ता, सतीश त्यागी,नगर संपर्क प्रमुख सुशील सैनी,अभिषेक त्यागी,पार्षद आकाश चौहान,पार्षद अनुज सिंह,प्रमोद चौहान,प्रमोद त्यागी,ब्रजकिशोर,सुभाष,होशियार सिंह,अशोक गुप्ता,अभिनव,मानस गोयल ,डॉ.मोहित,उपनगर शारीरिक प्रमुख उमेश मिश्रा,नगर कार्यवाह डॉ.अनुराग,डॉ.आलोक ,सत्यप्रकाश,ओमप्रकाश,विनोद शर्मा,कार्तिक,अतुल चौहान,विशाल राठौर,दीपक राजपूत,अरविंद सैनी सहित अनेक स्वयंसेवक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।विजयादशमी के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने स्वयंसेवकों को राष्ट्रसेवा के संकल्प को और दृढ़ करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य करने की प्रेरणा दी।पथ संचलन का समापन राष्ट्रभक्ति,संगठनात्मक एकता एवं समाज के प्रति समर्पण की भावना के साथ हुआ।


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