थाली-चम्मच बजाकर आशा कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध, मानदेय बढ़ाने की मांग
सीएमओ कार्यालय पर दसवें दिन भी जारी रहा आंदोलन, राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर अधिकारियों तक पहुंचाई आवाज
रिपोर्ट अमान उल्ला खान
सहारनपुर- निर्धारित मानदेय दिए जाने और राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शनिवार को सीएमओ कार्यालय के बाहर आंदोलन के दसवें दिन आशा कार्यकर्ताओं ने थाली-चम्मच बजाकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने अपनी मांगों की आवाज शासन और लखनऊ में बैठे अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास किया। साथ ही संबंधित अधिकारियों से उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।संयुक्त आशा संगठन के संयोजक संजय वालिया और जिला अध्यक्ष कमलेश सैनिक के नेतृत्व में आशा कार्यकर्ताओं ने सीएमओ कार्यालय के बाहर एकत्र होकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने थाली-चम्मच बजाकर अपना विरोध दर्ज कराया। उनका कहना था कि लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसी कारण उन्हें आंदोलन जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।इस मौके पर संगठन के संयोजक संजय वालिया ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं की आवाज लखनऊ में बैठे अधिकारियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से थाली-चम्मच बजाकर प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। गांवों और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, टीकाकरण तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में उनकी अहम भूमिका रहती है। इसके बावजूद उन्हें उनकी मेहनत के अनुरूप निर्धारित मानदेय और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।संजय वालिया ने उन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए, जो आशा कार्यकर्ताओं को 75 कामों के भुगतान की बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी आशा कार्यकर्ताओं को 75 कामों के पैसे देने की बात कर रहे हैं, तो उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आशा कार्यकर्ताओं से कराए जा रहे 75 कार्यों को पूरा कराने की जिम्मेदारी किस प्रकार निभाई जा रही है। संगठन की मांग है कि आशाओं के कार्यों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाए तथा उनके परिश्रम के अनुरूप उचित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।आशा कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में निर्धारित मानदेय, राज्य कर्मचारी का दर्जा और काम के अनुरूप उचित पारिश्रमिक शामिल हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की। संगठन ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित समाधान नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।दसवें दिन भी प्रदर्शन जारी रहने से आशा कार्यकर्ताओं में अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई दी। अब उनकी निगाहें शासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं कि उनकी मांगों के समाधान के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाते हैंधरने पर जिला अध्यक्ष कमलेश सैनी लालतेश,मिथिलेश,लता ने कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती तब तक कार्य बहिष्कार जारी रहेगाधरने में लता, लालतेश,मिथिलेश, नेहा, भावना, पूनम देवपुरा, सुदेश संगाथेड़ा, ममता भनैडा, पिंकी मोहरा, सुनीता, बोबी, प्रवीन, रविता, कविता, सीमा, ओमलता, मोनिका, मिथलेश फूलर, राजकी देवी, प्रीति शर्मा, रीना, काजल, मौसम देवी, पूनम, हमरेश, उर्मिला, लता, गीता, रचना धारहेड़ा, मीनाक्षी महेश्वरी, दीपमाला, सुषमा, बबली, सोनिया, बेबी, बबीता, पुनीता, बलवंती, शारदा, सरिता, माला, सताक्षी, रेखा, उषा, पिंकी देवी, सविता, सुलेखा, संगीता, सुमन, प्रेमा, राधा, विमला, रीता, नीलम, अर्चना, निशा, कौशल, पवन, नीलू, ललिता, आलिया, रुकसाना, मौसूम, बालेश, राजवती, मीरा, माया, सुरेश, काफिल, राखी, कमलेश, अमरेश, करमलेश, एकलेश, पल्लू, पूजा, प्रवेश, शीतल, दीपा और सुरजला समेत बड़ी संख्या में आशा कार्यकत्रियां मौजूद रही।

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