Ticker

6/recent/ticker-posts

निर्मल अखाड़े ने गुरू गोविंद सिंह की स्मृति में किया श्रद्धा उत्सव का आयोजन

 निर्मल अखाड़े ने गुरू गोविंद सिंह की स्मृति में किया श्रद्धा उत्सव का आयोजन

धर्म रक्षा में गुरू गोविंद सिंह का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा-श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह

एक दूसरे के पूरक हैं धर्म सत्ता और राज सत्ता-सांसद हरि साक्षी महाराज

रिपोर्ट श्रवण कुमार झा

हरिद्वार- सिक्ख धर्म के दसवें गुरू गुरू गोविंद सिंह महाराज की स्मृति में श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल द्वारा वार्षिक श्रद्धा उत्सव का आयोजन किया गया।श्रीपंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज की अध्यक्षता और कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज के संचालन में निर्मला छावनी स्थित वेदा ग्रीन में आयोजित वार्षिक श्रद्धा उत्सव में सभी अखाड़ों के संत महंत,गणमान्य अतिथी व बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए।कार्यक्रम के दौरान गुरूवाणी कीर्तन व संत सम्मेलन का आयोजन कर दशमेश गुरू गोविंद सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी।

संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि गुरू गोविंद सिंह महाराज महान योद्धा,कवि और कुशल संगठनकर्ता थे।सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और पंज प्यारों को अमृत छकाकर सिंह की उपाधि दी।गुरू गोविंद सिंह महाराज ने कई ग्रंथों की रचना की और गुरू ग्रंथ साहेब को गुरू घोषित किया। धर्म रक्षा में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।महामंडलेश्वर एवं सांसद हरि साक्षी महाराज ने कहा कि राज सत्ता और धर्म सत्ता एक दूसरे के पूरक हैं। मानवता और धर्म की रक्षा में अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले सिख गुरूओं के जीवन से सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।उन्होंने कहा कि सनातन धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए समस्त संत समाज एकजुट है।अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि राष्ट्र और धर्म रक्षा के लिए अपने पूरे परिवार का बलिदान देने वाले गुरू गोविंदसिंह महाराज भक्ति,ज्ञान और वैराग्य के प्रतीक थे।सभी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज की सेवा का संकल्प लेना चाहिए।जयराम पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्मरूवरूप ब्रह्मचारी एवं संत सुखदेव सिंह नामधारी ने कहा कि अपनी महान गुरू परंपराओं का पालन करते हुए श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज के नेतृत्व में श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल जिस प्रकार समाजसेवा और मानव कल्याण में योगदान कर रहा ह। वह सभी के लिए प्रेरणादायी है।मुखिया महंत भगतराम महाराज एवं स्वामी करोली शंकर महाराज ने भी श्रद्धालु भक्तों को आशीवर्चन प्रदान किए और कहा कि परमार्थ के लिए जीवन अर्पित करने वाले संत रूपी गुरूओं के सानिध्य में ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। कोठारी महंत जसविंदर सिंह,महंत रंजय सिंह,समाजसेवी अतुल शर्मा,महंत निर्भय सिंह ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया।इस अवसर पर महंत प्यारा सिंह,महंत खेम सिंह,महंत अंग्रेज सिंह,बाबा हठयोगी,स्वामी ऋषिश्वरानंद,महंत गंगादास,संत बलवीर सिंह, महंत नितिन महाराज,महंत विक्रम सिंह,महंत जगतार सिंह,महंत गुरूपाल सिंह,महंत सुरजीत सिंह,बीबी विनिंदर कौर सोढ़ी,महंत देवेंद्र सिंह,महंत सुखविंदर सिंह,महामंडलेश्वर स्वामी प्रवक्ता नंद,महंत लक्ष्मण सिंह शास्त्री,महंत शिवराज सिंह,महंत अंग्रेज सिंह,महंत प्यारा सिंह,महंत जगरूप सिंह,महंत गुरमीत सिंह,स्वामी भगवत स्वरूप,संत मक्खन सिंह दरिया,महंत राजेंद्र सिंह छोकरां,महंत गुरविंदर सिंह हजारा,संत सोहन सिंह अर्निवाल,महंत सुखचैन सिंह फिरोजपुर,महंत गुरू भगत सिंह कुरूक्षेत्र,महंत दर्शन सिंह शास्त्री,महंत गुरप्रीत सिंह कैलपुर,महंत प्रीतम सिंह बड़िया सहित बड़ी संख्या में संत महंत शामिल रहे। 


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

मुस्कान फाउंडेशन ने लगाया नीरज मलिक की याद में रक्तदान शिविर,  रिपोर्ट श्रवण कुमार झा  हरिद्वार-मुस्कान फाऊंडेशन हरिद्वार द्वारा संस्थाओं के संस्थापक अध्यक्ष नीरज मलिक की आठवीं पुण्यतिथि के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन रानीपुर मोड़ चंद्राचार्य चौक स्थित संजीवनी ब्लड बैंक रवि डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी लेब में लगाया गया।  रक्तदान शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि हरिद्वार नगर निगम की मेयर श्रीमती किरण जैसल,विशिष्ट अतिथि जिला भाजपा अध्यक्ष आशुतोष शर्मा रवि डायग्नोस्टिक पैथोलॉजी लैब के संस्थापक अध्यक्ष डॉ रविकांत शर्मा एवं मुस्कान फाऊंडेशन की अध्यक्ष श्रीमती नेहा मालिक ने संयुक्त रूप से  दीप कर किया। इस अवसर पर मुस्कान फाऊंडेशन की ओर से अतिथियों को नीम के पौधों के छोटे गमले और उस्मती चिन्ह भेंट किए गए।इस अवसर पर 22 यूनिट ब्लड एकत्र हुआ। इस अवसर पर मुस्कान फाउंडेशन के वरिष्ठ सदस्य रेणु अरोड़ा,सिमरन बग्गा,तुषार गाबा,मधुर अरोड़ा,जोली मालिक,सौरभ अरोड़ा,आयुष शर्मा,अक्षय शर्मा,हरी शर्मा आदि उपस्थित थे।