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शारदीय नवरात्रों में नगर भ्रमण करा कर वातावरण को भक्ति मय बनाया गया

शारदीय नवरात्रों में नगर भ्रमण करा कर वातावरण को भक्ति मय बनाया गया 

रिपोर्ट सुहैल खान

गंगोह- सैंकड़ों वर्षो से देवी मां की ज्योति को श्रद्धालुओं द्वारा शारदीय नवरात्रों में नगर भ्रमण करा कर वातावरण को भक्ति मय बनाया जा रहा है। यह कार्यक्रम पहले नवरात्र से आरंभ होकर दशहरा तक चलता है।

गंगोह के पेंठ बाजार स्थित मां काली मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भक्ति की बयार बहती है। मुख्य आकर्षण माता की ज्योति रहता है। शारदीय नवरात्र में पहले दिन ही पूजा-पाठ के साथ माता का आह्वान किया जाता है। इसके बाद पुजारी के स्वजन व मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की टोली इस ज्योति को लेकर ढोल-ढमाके के साथ रोजाना नाचते व व माता के जयकारे लगाते अलग-अलग मोहल्लों से रोज गुजरते हैं। रोजाना ज्योति को मंदिर पर लाकर स्थापित कर दिया जाता है। ज्योति भ्रमण के बाद यहां रोजाना माता का गुणगान भी होता है। दशहरा पर्व पर यहां छड़ी श्रद्धा के साथ लाकर स्थापित कर दी जाती है जो चतुर्दशी तक यहीं रहती है। उसके बाद छड़ी का विसर्जन कर दिया जाता है। इस बारे में मंदिर के पुजारी पं. सूर्य कांत शर्मा से बात की गई तो उन्होने बताया कि यह सिलसिला सैंकड़ों वर्षो से ज्यादा समय से चल रहा है। जहां आज मंदिर स्थापित है वहां उनके पूर्वज ज्योति भ्रमण के बाद छड़ी को स्थापित कर देते थे। दशहरे के बाद पैदल चल कर उसे मां शाकंभरी क्षेत्र में स्थापित किया जाता था जो चार दिन बाद विसर्जन कर दिया जाता था। उन्होने बताया कि अंग्रेजों के शासन में एक अधिकारी द्वारा छड़ी पर रोक लगा दी थी जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ा था। माता के दरबार में जाकर माफी मांगने के व स्थल पर लंबाई, चौड़ाई व ऊंचाई में सवा गज का चबूतरा स्वयं बनाने के बाद ही उसका संकट हटा था। इसके बाद यहां मंदिर बना दिया गया था जिसमें अब श्रद्धालुओं की भीड़ रहती हे। 

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