कभी टूटना नहीं चाहिए छात्रों का किताबों से रिश्ता - अरशद मदनी
दारुल उलूम देवबंद में हुआ वार्षिक इनामी जलसा
मैधावी छात्रों को उपहार स्वरूप मिली पुस्तकें व नकद धनराशि
रिपोर्ट समीर चौधरी
देवबंद- विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम देवबंद वरिष्ठ उस्ताद एवं शूरा सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि वर्तमान में दुनिया के हर कोने में की जा रही धार्मिक सेवाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से दारुल उलूम और उसके जाने-माने विद्वानों से जुड़ी हुई हैं। जिससे दारुल उलूम की अहमियत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
दारुल उलूम की दारुल हदीस में आयोजित हुए वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह को सम्बोधित करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने छात्रों को नसीहत करते हुए किताबों की अहमियत के बारे में बताया। कहा कि छात्र का किताबों से रिश्ता कभी नहीं टूटना चाहिए, बल्कि हर छात्र को अपना ज्ञान बढ़ाने के लिए अपनी निजी लाइब्रेरी बनानी चाहिए। उन्होंने मौजूदा हालात का हवाला देते हुए छात्रों को नसीहत दी कि वे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के बेवजह इस्तेमाल से बचें क्योंकि दीनी मदारिस सांप्रदायिक ताकतों के निशाने पर हैं, उनकी एक छोटी सी गलती को पहाड़ बनाकर पेश किया जा सकता है। मौलाना मदनी ने कहा कि मदरसों का अस्तित्व भी तभी तक कायम है जब तक यह बुजुर्गों के बताए रास्ते और आदर्शों पर चल रहे हैं।कार्यक्रम में शिक्षा प्रभारी मौलाना हुसैन हरिद्वारी की ओर से पिछले वर्ष की शैक्षिक रिपोर्ट पेश की गई, साथ ही मेधावी छात्रों को पुस्तकें और नकद धनराशि देकर सम्मानित किया गया। अंत में मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने देश व दुनिया में अमन सुकून और समृद्धि के लिए दुआ कराई। नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मुफ्ती राशिद आजमी, मौलाना नेमतुल्लाह आजमी, मौलाना सलमान नक्शबंदी, मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना शौकत बस्तवी, मौलाना खिजर कश्मीरी, मौलाना अफजल कैमूरी आदि मौजूद रहे।
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