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मनसा देवी हिल पहाड़ियाँ पर हो रहे भूस्खलन के उचित प्रबंधन हेतु उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण

मनसा देवी हिल पहाड़ियाँ पर हो रहे भूस्खलन के उचित प्रबंधन हेतु उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र की टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण’

रिपोर्ट श्रवण झा

हरिद्वार-भूस्खलन जोखिम प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संयुक्त रूप से उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र,विश्व बैंक तथा नॉर्वेजियन जियोटेक्निकल इंस्टिट्यूट द्वारा किया गया।इस कार्यक्रम में भारत,नेपाल एवं भूटान से आए प्रतिभागियों ने सहभागिता की।टीम के सदस्यों द्वारा मनसा देवी पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन के उचित प्रबंधन/ट्रीटमेंट हेतु स्थलीय निरीक्षण किया।

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य भूस्खलन जोखिम आकलन एवं न्यूनीकरण योजना निर्माण तथा आपदा प्रतिरोधकता हेतु सक्षम हस्तक्षेपों के माध्यम से क्षेत्रीय एवं संस्थागत क्षमता को सुदृढ़ करना है।यह एक सप्ताह-व्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम 02फरवरी को देहरादून में प्रारंभ हुआ,जिसमें कक्षा-आधारित सैद्धांतिक तकनीकी सत्रों के साथ-साथ व्यावहारिक फील्ड एक्सपोज़र को भी सम्मिलित किया गया।प्रशिक्षण की संरचना इस प्रकार तैयार की गई थी कि प्रतिभागियों को भूस्खलन प्रक्रियाओं,जोखिम कारकों,मूल्यांकन पद्धतियों तथा प्रबंधन रणनीतियों की समग्र एवं व्यवहारिक समझ विकसित हो सके। 04फरवरी 2026को हरिद्वार स्थित मानसा देवी पहाड़ियों के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में एक प्रशिक्षण भ्रमण आयोजित किया गया।यह भ्रमण उस स्थल पर आयोजित किया गया जहाँ भू-डिज़ाइन ,भू-अन्वेषण,ड्रिलिंग तथा भू-भौतिकीय जांच जैसे वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्य किए जा रहे हैं। इस अवसर पर प्रतिभागियों को न्स्डडब् के निदेशक डॉ. शांतनु सरकार के नेतृत्व में स्थल की वास्तविक परिस्थितियों तथा चल रही जांच एवं विश्लेषण प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर प्राप्त हुआ।एक्सपोज़र टूर का मार्गदर्शन निम्नलिखित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा किया गया।हाकोन हेयर्डाल,परियोजना निदेशक एवं व्याख्याता; भूस्खलन न्यूनीकरण एवं रोकथाम विशेषज्ञ,जिनके पास भूस्खलन जोखिम मानचित्रण एवं न्यूनीकरण परियोजनाओं में 32वर्षों से अधिक का अंतरराष्ट्रीय अनुभव है। डॉ.जीन-सेबास्टियन ल’ह्यूरू,वरिष्ठ भूस्खलन जोखिम प्रबंधन विशेषज्ञ;भूस्खलन प्रक्रियाओं,खतरा मूल्यांकन एवं न्यूनीकरण उपायों में विशेषज्ञता।सुश्री हाइडी हेफ्रे,वरिष्ठ भूस्खलन खतरा मानचित्रण विशेषज्ञ;तीव्र ढाल एवं दुर्गम क्षेत्रों में बड़े भूस्खलन मानचित्रण परियोजनाओं की परियोजना प्रमुख तथा रॉकफॉल मॉडलिंग की विशेषज्ञ। क्षेत्र भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों द्वारा मानसा देवी पहाड़ियों के भूस्खलन क्षेत्र की भू-आकृतिक संरचना,ढाल स्थिरता की स्थिति,भूमि उपयोग पैटर्न,जल निकासी व्यवस्था, प्राकृतिक एवं मानवीय प्रेरक कारकों तथा मौजूदा ढाल स्थिरीकरण एवं सुरक्षा उपायों का विस्तृत अवलोकन किया गया। विशेषज्ञों के साथ हुई चर्चाओं में यह स्पष्ट किया गया कि इस प्रकार के क्षेत्रीय अवलोकन किस प्रकार प्रभावी एवं स्थल-विशिष्ट भूस्खलन न्यूनीकरण उपायोंकृजैसे ढाल स्थिरीकरण कार्य,जल निकासी सुधार, निगरानी एवं चेतावनी प्रणालियाँ तथा दीर्घकालिक जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियाँकृकी योजना एवं डिज़ाइन में सहायक होते हैं।यह प्रशिक्षण टूर न्स्डडब्, उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ,यू-प्रिपेयर,सिंचाई विभाग,लोक निर्माण विभाग,वन विभाग,जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी,हरिद्वार तथा अन्य संबंधित रेखा विभागों के समन्वय से आयोजित किया गया।नेपाल एवं भूटान से आए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने भूस्खलन जोखिम प्रबंधन में बहु-एजेंसी एवं अंतर-देशीय सहयोग के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। चर्चाओं के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि भूस्खलन शमन उपायों की योजना, डिज़ाइन एवं क्रियान्वयन के लिए समन्वित,एकीकृत तथा बहु-विभागीय दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है।समग्र रूप से,इस क्षेत्रीय प्रशिक्षण एवं एक्सपोज़र टूर ने प्रतिभागियों की जांच-आधारित,वैज्ञानिक तथा स्थल- विशिष्ट भूस्खलन न्यूनीकरण डिज़ाइन की समझ को सुदृढ़ किया।यह प्रशिक्षण दीर्घकालिक ,सतत तथा जलवायु-अनुकूल आपदा प्रतिरोधकता हेतु सक्षम हस्तक्षेपों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ है।भ्रमण से प्राप्त निष्कर्ष एवं सीख भविष्य में भूस्खलन जोखिम को कम करने,प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करने तथा संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु प्रभावी भूस्खलन प्रबंधन रणनीतियों के विकास में सहायक सिद्ध होंगी।इस दौरान वरिष्ठ भूवैज्ञानिक रुचिका टंडन,भूवैज्ञानिक डॉ.रघुबीर,उप निर्देशक राजाजी पार्क अजय नेगी लिंगवाल ,जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत,उपमुख्य नगर अधिकारी रिषभ उनियाल,अधिशासी अभियंता लोनिवि दीपक कुमार,संबंधित अधिकारी सहित विभिन्न देशों से आए भूवैज्ञानिक मौजूद रहे।


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