शबे-ए-बरात की मुबारक रात में इबादत, तौबा तथा दुआओं के लिए उठे मुस्लिम समाज के लोगों के हाथ
रिपोर्ट नदीम निजामी
नकुड़-शबे-ए-बरात की मुबारक रात में इबादत, तौबा तथा दुआओं के नूर से रौशन रही। मुस्लिम समाज के लोगों ने पूरी रात जागकर अल्लाह की बारगाह में सजदा-रेज़ होकर अपने गुनाहों की माफी मांगी। मस्जिदों में नमाज़, कुरआन ख़्वानी और ज़िक्र-ए-इलाही का सिलसिला देर रात तक चलता रहा, जबकि कब्रिस्तानों में पहुंचकर लोगों ने अपने मरहूम बुज़ुर्गों की क़ब्रों पर फातिहा ख़्वानी कर उनके लिए मग़फिरत की दुआएं की।
रूहानियत का यह सिलसिला शबे-ए-बरात की रात तक ही सीमित नहीं रहा। अगले दिन बड़ी संख्या में लोगों ने नफ़्ल रोज़ा रखकर अल्लाह की इबादत को और मुकम्मल किया। रोज़ेदारों ने सब्र, तक़वा और अल्लाह की रज़ा हासिल करने की नीयत से दिन भर रोज़ा रखा और मुल्क व समाज में अमन-ओ-अमान की दुआ की। उलेमा के मुताबिक शबे-ए-बरात के बाद रोज़ा रखना नेक अमल माना गया है, जिससे इस मुबारक रात की बरकतें और बढ़ जाती हैं। शबे-ए-बरात के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पुलिस प्रशासन ने रात्रि गश्त के साथ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया, जबकि नगर पालिका प्रशासन द्वारा पथ प्रकाश की बेहतर व्यवस्था कराई गई और विशेष सफाई अभियान चलाया गया। इस दौरान सभासद जुनैद असग़र, फ़रमान निज़ामी, आमिर कुरैशी, अमीर आलम, सभासद पति हसीब निज़ामी, हैदर अली, राव ज़ीशान, लियाक़त निज़ामी, राव साबिर, हाफ़िज़ नोशाद कुरैशी, इसरार कुरैशी, अफ़ज़ाल निज़ामी आदि मौजूद रहे।
0 टिप्पणियाँ